NDA सरकार 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष में परिसीमन कानून 2026, संविधान संशोधन बिल और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में महिला आरक्षण लागू करन से संबंधित बिल पेश करेगी। विशेष सत्र में इन बिलों पर होने वाली चर्चा से पहले सियासी घमासान शुरू हो गया है।
Parliament Special Session: संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होगा। इस विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम पर चर्चा होने वाली है। इसके साथ ही NDA सरकार परिसीमन विधेयक-2026 पेश करेगी। इस विधेयक में राज्यों की विधानसभा सीटों की संख्या तय करने का अधिकार परिसीमन आयोग को दिए जाने का प्रावधान किया गया है। सरकार 2029 से पहले लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार 3 बड़े बिल पेश करने वाली है।
संसद के विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम पर चर्चा होने वाली है। विपक्ष का कहना है कि विशेष सत्र में 3 विधेयक पेश किए जाएंगे और वे इसका विरोध करेंगे। कांग्रेस नेता के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा- विपक्ष विशेष रूप से संविधान संशोधन विधेयक को हर संभव तरीके से हराने की कोशिश करेगा। देश को राजनीतिक भूकंप के लिए तैयार रहना चाहिए।
जयराम रमेश से पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार पर हमला बोला था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण विधेयक को पास करने के लिए 2011 की जनगणना का उपयोग किया जा रहा है, जबकि देश में वर्तमान में जो जाति आधारित जनगणना चल रही है, उसे नजरअंदाज किया जा रहा है। राहुल गांधी ने X पोस्ट पर कहा कि जो सरकार अभी प्रस्ताव दे रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। यह संशोधन परिसीमन और गेरीमैंडरिंग के जरिए सत्ता पर कब्जे की कोशिश है।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करती है और 2023 में संसद ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया था। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के साथ एक वीडियो संदेश भी शेयर किया है। इस वीडियो में राहुल गांधी ने पिछड़ा वर्ग, दलित, आदिवासी समुदाय और महिलाओं के लिए बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि यह आपके प्रतिनिधित्व का मुद्दा है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं चाहते कि यह फैसला जाति जनगणना, नई जनगणना या OBC जनगणना के आधार पर हो। वे 2011 की जनगणना का उपयोग करना चाहते हैं, जिसमें पिछड़े वर्गों के आंकड़े शामिल नहीं हैं।