CEA ने कहा कि भारत में प्राइवेट कंपनियां जमकर मुनाफा कमा रही है, लेकिन राष्ट्र की उन्नति के लिए उतना योगदान नहीं कर रही है। पढ़ें पूरी खबर...
मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि निजी कंपनियां और दूसरी-तीसरी पीढ़ी के उद्यमी नकद मुनाफा जमा करने और विदेश में फैमिली ऑफिस खोलने का रास्ता चुन रहे हैं, बजाय इसके कि देश में जमीन पर रियल एसेट्स में निवेश करें। उन्होंने कहा कि यह निजी क्षेत्र के लिए सोचने वाली बात है, क्योंकि राज्य और केंद्र स्तर पर नियामक वातावरण लगातार सुधर रहा है।
CEA वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि विकसित देशों में राष्ट्र-निर्माण केवल सरकारी नीतियों से नहीं हुआ, बल्कि उद्योग ने भी राष्ट्रीय हित में काम किया और अपने निजी हित को राष्ट्रीय हित के साथ जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर उंगली उठाना आसान है, लेकिन कभी-कभी उद्योग को भी अपनी ओर देखना चाहिए।
CEA ने कहा कि मौजूदा समय निजी क्षेत्र के लिए निवेश का अच्छा मौका है। भारतीय रुपया और चीनी युआन के रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) के बीच का अंतर कम हो रहा है, जिससे चीन से आयात महंगा और निर्यात सस्ता हो सकता है। इससे कंपनियां चीन से सप्लाई चेन को हटाकर भारत की ओर भी अपना रुख मोड़ सकती है।
भारत द्वारा साइन किए गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) कंपनियों को विदेशी बाजारों तक पहुंच देते हैं, साथ ही प्रतिस्पर्धा भी बढ़ाते हैं। CEA ने कहा कि भारतीय कंपनियों को इन FTAs का पूरा फायदा उठाना चाहिए। “समस्या यह है कि भारत में FTA का उपयोग अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। इसलिए उद्योग संघों और संगठनों को इन पर ज्यादा जागरूकता फैलानी चाहिए।”
विनिर्माण क्षेत्र पर व्यापक टिप्पणी करते हुए CEA वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि चीन से अभूतपूर्व प्रतिस्पर्धा के बावजूद यह क्षेत्र देश के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 17-18% का हिस्सा बनाए रखने में सफल रहा है। “यह असफलता की कहानी नहीं है। यह स्थिरता या ठहराव की कहानी है, जैसी आंख से देखा जाए।”
CEA ने चीन की हालिया दो अधिसूचनाओं (Decree No. 834 और 835) का जिक्र करते हुए कहा, “होटल कैलिफोर्निया में आप चेक आउट तो कर सकते थे लेकिन छोड़ नहीं सकते थे। लेकिन चीन कह रहा है कि आप न चेक आउट कर सकते हैं और न छोड़ सकते हैं।” ये नियम विदेशी कंपनियों को सप्लाई चेन चीन से बाहर ले जाने पर सजा देने की छूट देते हैं।उन्होंने कहा कि चीन किसी भी देश को चीन से सप्लाई चेन हटाने में मदद नहीं करने देना चाहता। भारत को अब अपनी संस्थागत व्यवस्थाएं बनानी होंगी, जैसे कि सप्लाई चेन सिक्योरिटी फ्रेमवर्क, अमेरिका के CFIUS (Committee on Foreign Investment in the United States) जैसी संस्था, और ब्लॉकिंग स्टैट्यूट।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने जोर दिया कि भारत को कंपनियों को आकर्षित करने के लिए बाजार पहुंच को महत्वपूर्ण लीवर के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। बढ़ती वैश्विक प्रतिबंधात्मक स्थिति में भारत को सक्रिय कदम उठाने होंगे ताकि वैश्विक कंपनियां चीन+1 रणनीति के तहत भारत आएं।