
Sonam Wangchuk Hunger Strike: राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आधिकारिक आवास की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है ताकि किसी भी संभावित स्थिति से निपटा जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से जंतर-मंतर इलाके में प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण माहौल और बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद मंत्री के आवास के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई।
दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अभी तक शिक्षा मंत्री के खिलाफ किसी प्रत्यक्ष खतरे की कोई सूचना सामने नहीं आई है। सुरक्षा बढ़ाने का फैसला आसपास के क्षेत्र में चल रहे आंदोलनों और संभावित भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जंतर-मंतर दिल्ली का प्रमुख प्रदर्शन स्थल है, जहां समय-समय पर छात्र संगठनों, कर्मचारियों और विभिन्न सामाजिक समूहों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं।
दिल्ली पुलिस ने आज (शनिवार) सुबह जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अपने साथ ले लिया। वांगचुक पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। पुलिस ने उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया है। इसके साथ ही, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर खाली करने के लिए अल्टीमेटम जारी किया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दो दिन पहले निर्देश जारी करते हुए कहा था कि सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना सरकारी डॉक्टरों द्वारा जांच की जाए और उनके जीवन की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक चिकित्सकीय उपाय किए जाएं। अदालत ने कहा कि वह चाहती है कि सरकारी डॉक्टर नियमित रूप से उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी करें, क्योंकि जीवन अमूल्य है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि यदि उनकी तबीयत बिगड़ती है तो स्थिति के अनुसार तत्काल उचित कदम उठाए जाएं।
फिलहाल इस सुरक्षा बढ़ोतरी को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान या उनके कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार शिक्षा क्षेत्र में कई सुधारों को आगे बढ़ा रही है। वहीं, छात्र संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से कुछ नीतिगत फैसलों को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।