
Dharmendra Pradhan Resignation Global Media: धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान का इस्तीफा दुनिया की भर मीडिया में सुर्खियां बनी। वैश्विक मीडिया ने भारत के जेन जी आंदोलन को लेकर कई रिपोर्टें की। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर द इकोनॉमिस्ट ने लिखा, ये भारतीय राजनीति के लिए दुर्लभ क्षण रहा। जेन जी ने मोदी सरकार को झुका दिया। उन्होंने अपने लेख में बताया कि हो सकता है कि भारत की 'जेन Z' पीढ़ी को वह शिक्षा न मिल रही हो जिसकी वह हकदार है। जेन जी ने मोदी सरकार को सबक सिखाया है।
ब्रिटेन की एक अखबार ने लिखा कि सोशल मीडिया को लेकर जेन जी की जानकारी और उसके इस्तेमाल ने भारत के पारंपरिक मीडिया के प्रति अविश्वास को बढ़ाया है। उन्होंने यह बता दिया कि सरकारी प्रोपेगैंडा की भी एक सीमा होती है। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि विरोध प्रदर्शन, पुलिस की बर्बरता और आंसू गैस के गोलों ने भी जेन जी पर कामयाबी नहीं पाई। भारत के युवा डटे रहे। उन्होंने अपनी ताकत से भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चौंका दिया।
फाइनेंशियल टाइम्स ने अपने आर्टिकल में लिखा कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सड़क पर नारेबाजी हुई। सरकार प्रदर्शनकारियों के एंटी नेशनल करार देने की कोशिश में भी नाकाम रही। FT ने लिखा कि इसकी मुख्य वजह यह थी कि सड़क से लग रहे नारे में शामिल लोग ज्यादातर बीजेपी के वोटर बेस से थे। छात्र और युवा हर दिन उस सरकार से जवाबदेही की मांग करने के लिए सामने आए जिसे लोगों ने वोट दिया था।
FT ने लिखा कि जहां तक मुझे याद है, यह पहली बार है जब भारतीयों के एक बड़े वर्ग ने प्रधानमंत्री की नाम लेकर आलोचना की है। विरोध करने वाले कई छात्र BJP के मुख्य वोटर बेस, हिंदू, मध्यम-वर्गीय परिवारों से आते हैं। जिनमें से कुछ को उनके माता-पिता ने विरोध करने के लिए प्रोत्साहित किया, तो कुछ अपने परिवारों की बात न मानकर वहां पहुंचे।
अलजजीरा ने लिखा कि मोदी सरकार की सोशल मीडिया रणनीतियां भी विफल रहीं, क्योंकि जेन जी ने बाजी पलट दी। अलजजीरा ने लिखा कि Gen Z सोशल प्लेटफॉर्म पर अपनी हिंदू-बहुसंख्यकवादी पार्टी के दबदबे को पलट रहा है और उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल उसके खिलाफ कर रहा है जिन पर भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से निर्भर रही है। साथ ही, प्रदर्शनकारियों का हवाला देते हुए कहा गया कि पहली बार, असहमति को अपराध मानने के सालों बाद मोदी से नफरत करना कूल हो गया है।