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Dharmendra Pradhan: ‘वंदे मातरम्’ विवाद में हुई पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की एंट्री, बोले- वोट बैंक के दबाव में काम करती है कांग्रेस

Dharmendra Pradhan On Congress: ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो पद गाने के कांग्रेस के फैसले पर धर्मेंद्र प्रधान ने हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया।
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Aug 20, 2026
Dharmendra Pradhan news
धर्मेंद्र प्रधान(फोटो-ANI)

Dharmendra Pradhan On Vande Mataram Controversy: कांग्रेस मुख्यालय में 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में पार्टी ने 1937 में पारित प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया है। इसके तहत कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। अब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने एक बार फिर 'तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति' का रास्ता अपनाया है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देश के राष्ट्रगौरव का प्रतीक है और इसके पूर्ण गान से पीछे हटने का फैसला कांग्रेस की पुरानी राजनीति है।

CWC बैठक में ‘वंदे मातरम्’ पर क्या फैसला हुआ?

बुधवार को नई दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। बैठक में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर भी चर्चा हुई। इसके बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी 1937 में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की सहमति से पारित प्रस्ताव का ही पालन करेगी। इसके मुताबिक कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो पद गाए जाएंगे। जयराम रमेश ने कहा कि 1937 के उस फैसले में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, रवींद्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस समेत कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की सहमति थी।

धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर साधा निशाना

वंदे मातरम्' विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कांग्रेस का 'तुष्टीकरण' एक बार फिर सामने आ गया है और इस बार निशाने पर ‘वंदे मातरम्’ है। उन्होंने कहा कि जिस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान की भावना जगाई, उसके पूर्ण गान से पीछे हटना सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं है। प्रधान ने इसे कांग्रेस की पुरानी वोट बैंक की राजनीति की पुनरावृत्ति बताया।
धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि 1937 में भी कांग्रेस ने वोट बैंक के दबाव में ‘वंदे मातरम्’ को सीमित करने का फैसला किया था। उन्होंने दावा किया कि उस दौर की राजनीति ने देश की एकता को कमजोर करने वाली ताकतों को बढ़ावा दिया और बाद में देश को विभाजन की त्रासदी झेलनी पड़ी।

‘देश की एकता और राष्ट्रीय सम्मान वोट बैंक से बड़े’

प्रधान ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के मौके पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इसके पूर्ण गान को कानूनी संरक्षण देकर कथित ऐतिहासिक भूल को सुधारने की कोशिश की है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी इतिहास की गलतियों से सबक लेने के बजाय उन्हें दोहराने पर अड़ी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी और कांग्रेस से सवाल किया कि देश की एकता और राष्ट्रीय सम्मान बड़ा है या वोट बैंक की राजनीति?

Updated on:
20 Aug 2026 05:27 pm
Published on:
20 Aug 2026 05:25 pm