Tamil Nadu Assembly Politics: डीएमके और कांग्रेस के अलग होने के बाद तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। भाजपा संसद में डीएमके को अपने करीब लाने की कोशिश में है, जबकि राज्य में कांग्रेस समेत सहयोगी दल टीवीके सरकार में शामिल होकर डीएमके को विपक्ष में अलग-थलग कर रहे हैं।
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के बीच गठबंधन टूटने के बाद राष्ट्रीय और राज्यीय राजनीति में नए समीकरण तेजी से बनते-बिगड़ते दिख रहे हैं। संसद में BJP इस दरार को अवसर के रूप में देख रही है और डीएमके को मुद्दा-आधारित समर्थन के लिए अपने करीब लाने की कोशिश में है। वहीं तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस, वीसीके और आइयूएमएल जैसे सहयोगी दलों ने डीएमके से दूरी बनाकर विजय-नेतृत्व वाली टीवीके सरकार में शामिल होकर राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।
डीएमके ने कांग्रेस से अलग होने के बाद तीखे हमले किए और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कांग्रेस से अलग बैठने की मांग की। बीजेपी इसे सकारात्मक संकेत मान रही है। पार्टी को उम्मीद है कि डीएमके भविष्य में संसद में उसके साथ काम कर सकती है, खासकर उन मामलों में जहां दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। परिसीमन बिल पर एनडीए को बहुमत नहीं मिला था, तब डीएमके के 22 सांसद विपक्ष के साथ खड़े थे।
अब भाजपा की रणनीति है कि डीएमके को बीजद, वाइएसआरसीपी और बीआरएस की तरह मुद्दा-आधारित समर्थन देने वाले दलों में शामिल किया जाए। आगामी राष्ट्रपति चुनाव में भी भाजपा डीएमके के समर्थन की संभावना तलाश रही है।
विधानसभा चुनाव परिणामों के तीन सप्ताह बाद ही तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा फेरबदल हुआ। डीएमके के तीन प्रमुख सहयोगी कांग्रेस, वीसीके और आइयूएमएल ने टीवीके सरकार में शामिल होकर डीएमके से दूरी बना ली है। इन दलों ने मिलकर 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जो विधानसभा का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा है। सामूहिक रूप से इन तीनों के पास 9 विधायक हैं और टीवीके कैबिनेट में चार मंत्री हैं। वहीं सीपीआई और सीपीएम ने बाहर से समर्थन देने का फैसला किया है। इस बदलाव ने डीएमके को छोटे दलों तक सीमित कर दिया है।
कांग्रेस ने औपचारिक रूप से डीएमके से नाता तोड़कर टीवीके सरकार में शामिल होने का ऐलान किया। वीसीके और आइयूएमएल ने भले ही आधिकारिक रूप से गठबंधन तोड़ने की घोषणा नहीं की हो, लेकिन टीवीके मंत्रालय में उनकी भागीदारी ने उन्हें सरकार का हिस्सा बना दिया है। इसका सीधा असर यह होगा कि जब डीएमके विपक्ष की भूमिका निभाएगी, तो ये दल उसके साथ खड़े नहीं होंगे।
दोनों घटनाक्रम संसद में भाजपा की सक्रियता और तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन का बिखराव—यह संकेत देते हैं कि डीएमके की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है। भाजपा इसे अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है, जबकि राज्य में टीवीके ने विपक्ष को अलग-थलग करने की रणनीति अपनाई है। यह परिदृश्य आने वाले दिनों में राष्ट्रीय और राज्यीय राजनीति में नए समीकरणों को जन्म देगा।