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‘मैं अंदरूनी राजनीति का शिकार हो गया’ DUSU Election में NSUI से टिकट नहीं मिलने पर बोले उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन

DUSU उपाध्यक्ष चुने गए निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने NSUI से टिकट नहीं मिलने पर अंदरूनी राजनीति का आरोप लगाया हैं। उन्होंने टिकट देने वाले नेतृत्व से जिम्मेदारी लेने की बात कही।
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Sep 20, 2026
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डूसू उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन(फोटो-IANS)

Deepanshu Shokeen: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उपाध्यक्ष पद जीतने वाले दीपांशु शौकीन ने NSUI में टिकट वितरण और संगठन की अंदरूनी राजनीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि टिकट देने वाले नेतृत्व के लोग न तो दबाव संभाल पाए और न ही पार्टी की अंदरूनी राजनीति को ठीक से मैनेज कर सके। उनके मुताबिक, इसका नुकसान उन उम्मीदवारों को हुआ जो चुनाव लड़ने के लिए योग्य थे। आपको बता दें कि दीपांशु शौकीन NSUI से जुड़े थे लेकिन चुनाव से पहले टिकट कट जाने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा।

दीपांशु शौकीन ने कहा कि चुनाव परिणामों से साफ है कि छात्रों ने किसे अपना समर्थन दिया। उन्होंने टिकट वितरण में गलती होने की बात कहते हुए कहा कि इसकी जिम्मेदारी उन लोगों को लेनी चाहिए, जिन्होंने टिकट देने का फैसला किया था। उनके अनुसार, तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने NSUI के खिलाफ चुनाव लड़ा और उन्हें अच्छा समर्थन मिला, जो संगठन के भीतर की राजनीति की ओर इशारा करता है।

‘टिकट देने वालों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए’


जब दीपांशु से पूछा गया कि वह NSUI की अंदरूनी राजनीति के लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं, तो उन्होंने पार्टी के चुनाव प्रभारी और उन नेताओं की ओर इशारा किया जिन्हें चुनाव की पूरी जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका थी, उन्हें सीधे तौर पर इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। दीपांशु के बयान में किसी एक नेता का नाम नहीं लिया गया। दीपांशु ने यह भी कहा कि चुनाव में NSUI के खिलाफ तीन निर्दलीय उम्मीदवारों का उतरना और उन्हें अच्छा वोट मिलना बताता है कि संगठन के भीतर काफी ज्यादा अंदरूनी राजनीति थी। उनके मुताबिक, इसका नुकसान पार्टी को भी हुआ।

NSUI का टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़े चुनाव


दीपांशु शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे हैं और उन्होंने संगठन से DUSU चुनाव के लिए टिकट मांगा था। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने NSUI की ओर से नामांकन भी दाखिल किया था, लेकिन बाद में उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।

चुनाव में दीपांशु ने 30,615 वोट हासिल कर उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। वह चार केंद्रीय पदों पर जीतने वाले उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवार भी रहे। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी के ईशु मौर्य को 16,910 वोट मिले, जबकि NSUI के वीर छत्रथ को 4,313 वोट मिले।

Updated on:
20 Sept 2026 08:06 pm
Published on:
20 Sept 2026 07:55 pm
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