
Indo-Pacific : हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक हलचलों के बीच भारत और इंडोनेशिया ने अपने सदियों पुराने ऐतिहासिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई देने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित आठवीं भारत-इंडोनेशिया संयुक्त आयोग बैठक की सह-अध्यक्षता की। चार बरसों के लंबे अंतराल के बाद हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, समुद्री व्यापार और फार्मास्युटिकल्स जैसे कई बड़े मोर्चों पर सहयोग को और मजबूत करने का एक ठोस रोडमैप तैयार किया गया।
विदेश मंत्री जयशंकर ने इंडोनेशियाई प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए दोनों देशों की 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' पर बल दिया। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2025 में भारत के 76वें गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो का मुख्य अतिथि के रूप में भारत आना बहुत ऐतिहासिक था। इस राजकीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो के बीच जो द्विपक्षीय बातचीत हुई थी, उसने दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को एक नई ऊर्जा और दिशा देने का काम किया है।
बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सैन्य स्तर पर भी जुड़ाव गहरा करने पर सहमति बनी है। जयशंकर ने साफ किया कि इस वार्ता में समुद्री व्यापार, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कड़ा रुख अपनाने जैसे मुद्दों पर गहराई से चर्चा की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 2004 के आतंकवाद विरोधी समझौते के बाद से ही दोनों देश लगातार सुरक्षा वार्ता आगे बढ़ा रहे हैं, जिसे अगस्त 2024 में जकार्ता में हुई संयुक्त कार्य समूह की छठी बैठक से और अधिक मजबूती मिली थी।
साल 2018 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा पाने के बाद से भारत और इंडोनेशिया के संबंध लगातार फल-फूल रहे हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के ये दो सबसे बड़े लोकतंत्र वर्तमान में 'आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी (2026-2030)' के तहत क्षेत्रीय भू-राजनीतिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम कर रहे हैं। इस ताजा बैठक को वैश्विक और क्षेत्रीय राजनीति में आ रहे बदलावों के लिहाज से एक गेम-चेंजर कदम माना जा रहा है।
भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इंडोनेशिया के साथ भारत के रिश्ते मजबूत होना सीधे तौर पर चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' नीति को काउंटर करता है। हालांकि यह पूरी तरह से देश की सुरक्षा और विदेशी नीति से जुड़ा मामला है, इसलिए इस पर घरेलू राजनीति में कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसे भारत की 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी (Act East Policy) की बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।
इस जेसीएम बैठक के बाद अब दोनों देशों के रक्षा सचिव और सैन्य अधिकारी जल्द ही जकार्ता में मिलेंगे, ताकि समुद्री सुरक्षा और साझा नौसैनिक गश्त के प्रस्तावों को जमीन पर उतारा जा सके। साथ ही, 2026-2030 के आसियान-भारत रोडमैप पर फाइनल डील की उम्मीद है। इस खबर का एक महत्वपूर्ण पहलू व्यापारिक रूट की सुरक्षा है। भारत का अधिकांश समुद्री व्यापार मलक्का जलडमरूमध्य से होता है, जहाँ चीन का दखल बढ़ रहा है। इंडोनेशिया के साथ मजबूत सुरक्षा संबंधों का सीधा मतलब है कि भारत अब संकट के समय इस वैकल्पिक समुद्री रास्ते को सुरक्षित रख सकता है। यह कदम पूरी तरह से भारत की आर्थिक सुरक्षा को रीढ़ देने वाला है। ( इनपुट : ANI)