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Ambikapur News: 7 साल बाद जेल से रिहा होने की थी खुशी, लेकिन 2 घंटे बाद ही किस्मत ने दे दिया धोखा, घर पहुंची लाश

Prisoner died after released: अपनी दूसरी पत्नी की हत्या के मामले में अंबिकापुर के सेंट्रल जेल में सजा काट रहा था बंदी, अच्छे आचरण की वजह से शासन ने 2 साल की सजा कर दी थी माफ
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Prisoner died after released from Jail

Ambikapur news, केंद्रीय जेल अंबिकापुर (Photo- Patrika)

अंबिकापुर. दूसरी पत्नी की हत्या के मामले (Wife murder case) में 7 साल तक सजा काटने के बाद बंदी की आजादी का इंतजार तो खत्म हो गया, लेकिन किस्मत ने उसे घर की चौखट तक भी नहीं पहुंचने दिया। केंद्रीय जेल से रिहा होने के महज 2 घंटे बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उसकी मौत हो गई। घर लौटने की जगह उसका पार्थिव शरीर पहुंचा, जिससे परिवार में मातम पसर गया। दरअसल गांधीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम खलिबा निवासी श्याम जतन साय 66 वर्ष की 2 पत्नी थीं। उसने 7 साल पूर्व अपनी दूसरी पत्नी की हत्या कर दी थी। वर्ष 2022 में उसे आजीवन कारावास की सजा हुई थी। तब से वह केन्द्रीय जेल अंबिकापुर में निरूद्ध था।

बता दें कि जेल के अंदर श्याम जतन साय के अच्छे आचरण व व्यवहार के कारण 2 साल की सजा शासन द्वारा माफ की गई थी। 24 जुलाई की दोपहर 12.30 बजे उसे रिहा किया जाना था। रिहा होने से एक दिन पूर्व जेल में ही उसकी तबियत बिगड़ गई। उसे लूज मोशन की शिकायत पर जेल प्रशासन द्वारा 23 जुलाई की शाम को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

फिर पूर्व निर्धारित समय के अनुसार जेल प्रशासन द्वारा 24 जुलाई की दोपहर 12.30 बजे उसे अस्पताल से ही रिहा कर दिया गया। रिहाई के करीब 2 घंटे बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत (Prisoner died) हो गई।

रिहाई की सूचना से खुश था श्याम जतन

केन्द्रीय जेल (Central jail Ambikapur) अधीक्षक अक्षय राजपूत ने बताया कि जेल के अंदर बंदी श्याम जतन का व्यवहार काफी अच्छा था। उसके व्यवहार में सुधार होने के कारण शासन द्वारा 2 साल की सजा माफ की गई थी। 24 जुलाई की दोपहर 2.30 बजे रिहा होने की जानकारी मिली तो वह काफी खुश हुआ था। उसके आंखों से खुशी की आंसू निकल आए थे। लेकिन पता नहीं था कि उसकी खुशी कुछ ही घंटे में खत्म हो जाएगी।

Prisoner dead body: पार्थिव शरीर लेकर लौटी बेटी

रिहाई से एक दिन पूर्व जेल प्रशासन द्वारा श्याम जतन की बेटी सानिया को उसके रिहाई की जानकारी दी गई थी और उसे आकर ले जाने के लिए कहा गया था। सूचना पर उसकी बेटी पहुंची थी। निर्धारित समय पर 12.30 बजे जेल प्रशासन ने उसे रिहा करते हुए अस्पताल से परिजन को सौंप दिया था, लेकिन इलाज जारी था। बेटी भी खुश थी कि अब पिता घर लौटेंगे लेकिन किसे पता था बहुत बड़ा गम सामने है। 7 साल बाद वह घर के चौखट तक भी नहीं पहुंच सका और रिहाई (Released from Jail) के 2 घंटे बाद अस्पताल में ही मौत हो गई।

दूसरी पत्नी की कर दी थी हत्या

श्याम जतन की 2 पत्नी थी। उसने दूसरी पत्नी की हत्या (Murder of second wife) की थी। जबकि उसकी पहली पत्नी व उसके बच्चे से संबंध अच्छे थे इसलिए पहली पत्नी की बेटी सानिया उसे लेने आई थी। लेकिन वह पिता को जीवित नहीं, उसके पार्थिव शरीर को लेकर गई।

रिहाई के समय अस्पताल में भर्ती के नियम

इस संबंध में केंद्रीय जेल के अधीक्षक अक्षय राजपूत ने बताया कि रिहाई के समय अगर बंदी अस्पताल में भर्ती है तो उसे जेल प्रशासन को सुपुर्द कर दिया जाता है और अस्पताल से ही रिहा कर दिया जाता है। उसे दोबारा जेल नहीं लाया जा सकता है। इस दौरान उसके परिजन भी होते हैं।

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