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बिहार चुनाव में नेताओं के परिजन नहीं बन पाएंगे विधायक! जानें क्या है BJP की रणनीति

Bihar Election: पार्टी सूत्रों का मानना है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से बिहार में भाजपा की संगठनात्मक ताकत में वृद्धि हुई है।

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Oct 04, 2025
बिहार में जल्द ही चुनावों की तारीख का ऐलान होगा (Photo-IANS)

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने है। विधानसभा चुनावों की तारीख का किसी भी समय ऐलान हो सकता है। शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में बिहार के सभी 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठक की गई है, जिसमें चुनावों पर चर्चा हुईं। वहीं विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने वंशवादी राजनीति के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का संकेत दिया है।

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नेताओं के परिजनों को नहीं मिलेगा टिकट

IANS के मुताबिक पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया है कि मौजूदा सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों के परिजनों को इस बार टिकट नहीं दिया जाएगा। इसको लेकर बीजेपी के पदाधिकारी ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य परिवारवाद का विरोध करने की पार्टी की विचारधारा को मज़बूत करना है। 

'कई कार्यकर्ता शीर्ष पदों तक पहुंचे'

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही ज़मीनी कार्यकर्ताओं को यह विश्वास दिलाना है कि उनकी उम्मीदवारी की संभावनाएं राजनीतिक वंशवाद की कमी तक सीमित नहीं हैं। पार्टी सूत्र के अनुसार- बीजेपी एक कैडर-आधारित पार्टी है। कई साधारण बूथ-स्तरीय कार्यकर्ता शीर्ष पदों पर पहुंचे हैं।

मौजूद सांसदों को मिल सकता है टिकट

बता दें कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी कुछ मौजूदा सांसदों को भी टिकट दे सकती है। इससे पहले कई राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने मौजूदा सांसदों को टिकट दिया था, अब यह रणनीति बिहार में भी लागू कर सकती है। 

NDA ने 225 सीटें जीतने का रखा लक्ष्य

बिहार चुनाव 2010 में बीजेपी ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था और करीब 91 सीटें जीती थी। वहीं इस बार NDA ने 225 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। बता दें कि बिहार में बीजेपी की स्थिति में पिछले चुनवों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 2005 में 55 सीटें, 2010 में 91 सीटें, 2015 में 54 सीटें और 2020 में 74 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि पार्टी सूत्रों का मानना है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से राज्य में भाजपा की संगठनात्मक ताकत में वृद्धि हुई है।

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