
Sheikh Hasina on Bangladesh Return: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में है और वे यहां निर्वासित जीवन बिता रही हैं। उन्हें अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक-विरोध प्रदर्शनों और तख्तापलट के बाद अपना पद छोड़कर हेलीकॉप्टर से भागकर भारत आना पड़ा था। उनकी बांग्लादेश वापसी को लेकर कई कयास लगाए जाते रहे हैं, लेकिन अब वे वतन वापसी को तैयार है। उन्होंने कहा है कि मैं इसी साल अपने मुल्क लौटूंगी।
बांग्लादेश वापसी को लेकर एनडीटीवी को दिए ई-मेल इंटरव्यू में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा, 'यह मेरी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का सवाल नहीं है। यह बांग्लादेश के लोगों के राजनीतिक अधिकारों, लोकतंत्र की बहाली, कानून के शासन और मुक्ति संग्राम की भी भावना से जुड़ा विषय है। सत्ता के लिए मैं राजनीति नहीं करती। देश के लोगों के कल्याण और राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के 'सोनार बांग्ला' के सपने को साकार करने के लिए राजनीति करती हूं।'
अपने खिलाफ दिए गए फैसले पर इंटरव्यू में उन्होंने कहा, न्यायपालिका को प्रतिरोध का हथियार बना दिया गया है, जिससे आवामी लीग को नेतृत्व विहीन किया जा सके। पहले भी ऐसे प्रयास हुए हैं और असफल रहे हैं। मौत से मैं नहीं डरती। मैंने 1975 में अपने माता-पिता, भाइयों, लगभग पूरे परिवार को खो दिया। मुझ पर 21 अगस्त को ग्रेनेड से हमला हुआ। अनेक साजिशें मेरे खिलाफ रची गईं, लेकिन मैं लोगो के साथ हर बार खड़ी रही। मुझे जनता ने 5 बार प्रधानमंत्री चुना। देश के लिए मैंने काम किया। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूं कि सभी बाधाओं-साजिशों को पार कर मैं इस वर्ष अपने देश लौटूंगी।
इंटरव्यू में पार्टी पर प्रतिबंध और कई मामलों के बावजूद राजनीतिक वापसी के सवाल पर शेख हसीना ने कहा, आवामी लीग की राजनीतिक वापसी किसी सरकार की कृपा पर नहीं निर्भर है। पार्टी के कार्यालय बंद किए जा सकते हैं। राजनीतिक गतिविधि पर रोकी जा सकती है, लेकिन लोगों के दिलों से आवामी लीग को मिटाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोग पार्टी के समर्थन में रैलियां निकाल रहे, कार्यक्रमों में शामिल हो रहे। यह पार्टी के फिर से उभरने के संकेत हैं।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, बांग्लादेश का जन्म, सैन्य शासन, भेदभाव, दमन और सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ था। बांग्लादेश के संविधान की नींव राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय पर आधारित थी। इस आधार को कमजोर करना बांग्लादेश की मूल पहचान पर हमला है। उन्होंने कहा, 5 अगस्त के बाद मुक्ति संग्राम की भावना पर हमला, स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान, स्मारकों को नुकसान, राष्ट्रपिता के निवास पर हमले और अल्पसंख्यकों, मंदिरों, सूफी दरगाहों और सांस्कृतिक संस्थानों को निशाना बनाया गया। 'जय बंगला' नारे को अपराध की तरह देखा गया। यह बांग्लादेश को विफल राज्य की दिशा में ले जा रहा।
BNP और अवामी लीग पर प्रतिबंध हटाने को लेकर बैकचैनल बातचीत के सवाल पर उन्होंने कहा, लोगों को भ्रमित करने के लिए फैलाया गया है। मेरा स्पष्ट रुख है कि लोकतंत्र, चुनावी अधिकार और न्याय जैसे मसले गुप्त सौदेबाजी का विषय नहीं हो सकते। ये जनता के संवैधानिक अधिकार हैं। उन्होंने कहा, राजनीतिक दल या किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला है तो स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई होनी चाहिए। राजनीतिक दबाव में चलने वाले न्यायाधिकरणों के माध्यम से नहीं।
बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरवाद, अल्पसंख्यकों और मंदिरों पर हमले को लेकर एनडीटीवी के पूछे गए सवाल के जवाब में शेख हसीना ने कहा, यह दुखद और चिंताजनक है। मुक्ति संग्राम की ताकतें कमजोर हुई हैं और सांप्रदायिक शक्तियों के प्रभाव बढ़ा है। 5 अगस्त के बाद अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मंदिरों में तोड़फोड़ हुई। लोगों के घर लूटे गए धार्मिक आयोजनों में बाधाएं पैदा की गई हैं। सबसे चिंता बढ़ाने वाली बात यह है कि सरकार इसे नकारती है। इससे अपराधियों को बढ़ावा मिलता है।
भारत में निर्वासन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, निजी जैसी कोई चीज मेरे जीवन में बहुत कम रही है। अपना पूरा जीवन मैंने बांग्लादेश के लोगों के लिए समर्पित किया। आज भी परिवार से संपर्क बना हुआ है। मेरा दिल बांग्लादेश में ही है। मेरा संघर्ष रुका नहीं है। देश की स्थिति पर रोजाना नजर रखती हूं। मानवाधिकार के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश करती हूं। बांग्लादेश की जनता फिर से लोकतंत्र बहाल करेगी, ऐसा मेरा विश्वास है।