
Mahatma Gandhi: अहमदाबाद के ऐतिहासिक साबरमती आश्रम के पुनर्विकास का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। नए गांधी आश्रम परिसर में 23 संग्रहालयों को डिजाइन करने का जिम्मा पेरिस मुख्यालय वाली ग्लोबल म्यूजियम कंपनी म्यूजियम स्टूडियो को दिया गया है। यह कंपनी टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स की सहायक कंपनी इकोफर्स्ट सर्विसेज के साथ मिलकर काम करेगी। इस पूरे प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बापू के जीवन, उनके विचारों और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान को आधुनिक और प्रामाणिक तरीके से दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है।
इस ऐतिहासिक परियोजना में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख संस्थाएं एक साथ मिलकर काम कर रही हैं। पेरिस स्थित म्यूजियम स्टूडियो और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स की सहयोगी कंपनी इकोफर्स्ट सर्विसेज लिमिटेड को इन 23 संग्रहालयों को डिजाइन और विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। करीब 113 करोड़ रुपये के इस टेंडर में विरासत के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक संग्रहालय तकनीकों का संतुलन रखा जाएगा। इसके अलावा, पूरे परिसर की समीक्षा और प्रूफ-चेकिंग का काम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) द्वारा किया जा रहा है।
आश्रम परिसर की पुरानी 28 ऐतिहासिक इमारतों का पुनरुद्धार उसी पारंपरिक तकनीक और सामग्री से किया जा रहा है, जैसे इन्हें 100 साल पहले बनाया गया था। इसमें चूना प्लास्टर, सागौन की लकड़ी और ईंटों का उपयोग हो रहा है। प्लास्टर की मजबूती बढ़ाने के लिए उड़द की दाल, गुड़ और मेथी के बीज से बने पारंपरिक लेप का इस्तेमाल किया जा रहा है। मूल स्वरूप को बिना नुकसान पहुंचाए इन इमारतों को आधुनिक संग्रहालयों के रूप में विकसित किया जाएगा।
संग्रहालयों की विषय-वस्तु (कंटेंट) और डिजाइन को अंतिम रूप देने के लिए नौ सदस्यीय कंटेंट एडवाइजरी कमेटी (CAC) का गठन किया गया है। इसमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राजश्री बिड़ला, बिहार म्यूजियम के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह और गुजरात विद्यापीठ के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह समिति गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका के दिनों, उनके विचारों तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की प्रामाणिकता की गहन जांच कर रही है। समिति की स्वीकृति के बाद ही डिजाइन और प्रदर्शनी की सामग्री को अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
आज की युवा पीढ़ी की रुचि को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुतिकरण की आधुनिक शैलियों का उपयोग किया जाएगा। हालांकि, आश्रम की सादगी और मूल भावना को बनाए रखने के लिए डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले की सीमा कुल सामग्री के 30 प्रतिशत तक ही सीमित रखी गई है। जिन क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण स्थापित किए जाएंगे, केवल वहीं एसी की व्यवस्था की जाएगी। इस वृहद परियोजना का मास्टरप्लान प्रसिद्ध अर्बन प्लानर बिमल पटेल की फर्म द्वारा तैयार किया गया है और इसे केंद्र व गुजरात सरकार के संयुक्त प्रयास से पूरा किया जा रहा है।