
Sonam Wangchuk: सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक अभी गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के ICU में भर्ती हैं। अस्पताल के अंदर और वांगचुक के आस-पास दिल्ली पुलिस की भारी तैनाती की गई है। उनकी पत्नी, डॉ. गीतांजलि जे. आंग्मो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस बारे में एक बयान जारी किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि सोनम वांगचुक पुलिस या कानूनी कस्टडी में नहीं हैं, तो ऐसी पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं।
अस्पताल के अंदर के माहौल का जिक्र करते हुए गीतांजलि आंग्मो ने अपनी पोस्ट में लिखा कि चाहे पहले सरकारी सफदरजंग अस्पताल हो या अभी प्राइवेट मेदांता अस्पताल, हर कोने में पुलिस की मौजूदगी है। उन्होंने लिखा, "हर तरफ पुलिस ही पुलिस है, मेन गेट पर, रिसेप्शन पर, लिफ्ट के पास और सोनम वांगचुक के ICU रूम के ठीक बाहर। पुलिस ही तय कर रहे हैं कि कौन उनसे मिल सकता है और कौन नहीं।" गीतांजलि का कहना है कि पुलिस सोनम के समर्थकों, शुभचिंतकों और नेताओं को अस्पताल में उनसे मिलने से रोक रही है।
पुलिस प्रशासन के सख्त रवैये पर सवाल उठाते हुए गीतांजलि ने अपने पोस्ट में लिखा, "एक जागरूक लोकतंत्र में पुलिस की असली भूमिका क्या है? नागरिकों की सुरक्षा करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना, या सत्ता में बैठे लोगों के कहने पर आम नागरिकों और सोशल एक्टिविस्ट को कंट्रोल करना? ये ऐसे सवाल हैं जो हर भारतीय को आज खुद से और सिस्टम से पूछने चाहिए।"
दरअसल, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान वांगचुक को हिरासत में लिया था और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। जिसके बाद गीतांजलि ने खुद दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करके उन्हें मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा था कि एक स्वतंत्र नागरिक के तौर पर, उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है। सुनवाई के दौरान, दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने कहा था कि सोनम वांगचुक न तो किसी अपराध के आरोपी हैं और न ही पुलिस कस्टडी में हैं।
कोर्ट के इसी फैसले को लेकर गीतांजलि ने अपने पोस्ट में लिखा, "अगर कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उन्हें हिरासत में नहीं रखा गया है, तो फिर किस अधिकार के तहत पुलिस यह सब कर रही है?"
26 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सरकार के साथ समझौता किया। वांगचुक ने सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही जूस पीकर अपना उपवास खत्म किया। इस आश्वासन में कहा गया था कि संसद के मॉनसून सत्र में NEET परीक्षा में पारदर्शिता, पेपर लीक और गड़बड़ियों को रोकने के उपायों और प्रभावित छात्रों को राहत देने के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।