वैश्विक गैस संकट के बीच सरकार ने कमर्शियल LPG सप्लाई 70 प्रतिशत तक बढ़ाकर उद्योगों को राहत दी है। ईरान संकट के बीच यह कदम उत्पादन और रोजगार बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है।
वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत में गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण आयात बाधित होने से कई उद्योगों पर दबाव बढ़ गया था। इसी बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की आपूर्ति 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दी है, जिससे औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है। यह निर्णय खासतौर पर उन सेक्टर के लिए अहम है जो उत्पादन और रोजगार दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सरकार के नए आदेश के अनुसार अब कमर्शियल LPG की कुल आपूर्ति संकट पूर्व स्तर के 70 प्रतिशत तक पहुंचा दी गई है। पहले यह 50 प्रतिशत तक सीमित थी। अतिरिक्त 20 प्रतिशत आवंटन जोड़कर यह बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले का मकसद गैस की कमी से जूझ रहे उद्योगों को संचालन जारी रखने में मदद देना है। स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, केमिकल और प्लास्टिक जैसे सेक्टर को प्राथमिकता दी जाएगी। खासतौर पर वे प्रोसेस इंडस्ट्री जिनमें LPG का उपयोग विशेष हीटिंग के लिए होता है और जिसे नैचुरल गैस से बदला नहीं जा सकता, उन्हें विशेष राहत मिलेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त LPG सप्लाई उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगी जो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में रजिस्टर होंगे और अपने शहर की गैस वितरण एजेंसी के साथ पीएनजी के लिए आवेदन करेंगे। हालांकि जिन उद्योगों में LPG का उपयोग अनिवार्य है और जिसका कोई विकल्प नहीं है, उन्हें इस शर्त से छूट दी गई है। इससे लाखों श्रमिकों को रोजगार देने वाले सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा राज्यों से भी कहा गया है कि वे सुधार आधारित10 प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन का तुरंत लाभ उठाएं, जिससे कुल सप्लाई और बेहतर हो सके।
इस फैसले के बीच ईरान से भी राहत भरी खबर आई है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह LPG लेकर आने वाले भारतीय जहाजों को होर्मुर्ज स्टेट (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति देगा। यह कदम भारत और ईरान के बीच हुई बातचीत के बाद सामने आया है। इससे भविष्य में गैस सप्लाई की स्थिति कुछ हद तक स्थिर हो सकती है। वहीं राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को LPG वितरण की जिम्मेदारी दी गई है ताकि जरूरत के हिसाब से प्राथमिकता तय की जा सके।