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गुजरात में साइबर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’! ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 में 622 करोड़ का फ्रॉड बेनकाब

622 Crore Cyber Fraud: गुजरात की CID क्राइम के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने बताया कि पिछले एक महीने में 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत 622 करोड़ रुपये से अधिक का साइबर फ्रॉड पकड़ा गया है।

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Operation Mule Hunt

Operation Mule Hunt 2.0 Gujarat: गुजरात CID क्राइम के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने साइबर फ्रॉड के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 के तहत एक महीने में 622 करोड़ रुपये से ज्यादा के फ्रॉड धन का पता लगाया है। इसके साथ ही 40 लोगों को गिरफ्तार किया है। बुधवार को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह अभियान साइबर अपराधों में तेजी को देखते हुए डीजीपी केएलएन राव और आईजी बीपिन अहीर के निर्देश पर शुरू किया गया था।

पुलिस ने बताया कि अभियान में 1,039 साइबर फ्रॉड शिकायतों की पहचान हुई है, जिनमें 288 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेटवर्क सामने आया। आरोपी अपने और दूसरों के नाम पर बैंक खाते खोलकर कमीशन लेकर फ्रॉड का पैसा जमा करते, नकद में निकालते और अंगड़िया (हवाला) चैनल के जरिए ट्रांसफर करते थे। वे अपनी पहचान छिपाते और जानबूझकर साइबर अपराध से प्राप्त धन को हैंडल करते थे।

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181 शिकायतें और 81 FIR दर्ज

सूरत और भावनगर में NCCRP पोर्टल पर जांच से 181 शिकायतें और 81 FIR दर्ज होने का पता चला, जिनमें करीब 174.63 करोड़ रुपये शामिल हैं। मुख्य आरोपी मुकेश मेर (23) और फरीदखान पठान (22) को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से 4 मोबाइल, 1 लैपटॉप बरामद हुए। डिवाइस विश्लेषण में 125 फर्मों, 65 व्यक्तियों के दस्तावेज और 868 फर्जी इनवॉइस मिले।

उंझा में 114 करोड़ का फ्रॉड लिंक

उंझा में अक्षय पटेल और देवेंद्र पटेल को गिरफ्तार किया गया। अक्षय ने खुद और फर्मों के नाम पर खाते खोलकर फ्रॉड पैसा निकाला, जबकि देवेंद्र ने दोस्तों के नाम पर खाते खोलकर कमीशन कमाया। 2 मोबाइल फोन जब्त किए गए। इन खातों से 114 करोड़ रुपये से ज्यादा का साइबर फ्रॉड जुड़ा था।

राजकोट में 4 गिरफ्तारियां

राजकोट में चेतन अमलानी (28), जतिन कक्कड़ (41), कपिल कोटक (34) और महेंद्र कोहकिया (42) को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से 6 मोबाइल और 40 लाख रुपये नकद बरामद हुए। यहां 26 शिकायतें और 59.79 लाख रुपये का फ्रॉड लिंक मिला।

आरोपियों पर ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड, UPI फ्रॉड, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और डिपॉजिट फ्रॉड जैसे कई मामले दर्ज हैं। CID क्राइम ने जनता को सलाह दी है- लालच में अपना बैंक अकाउंट किसी को न दें। अकाउंट होल्डर ही जिम्मेदार होता है। यह अभियान साइबर अपराधियों के म्यूल अकाउंट नेटवर्क को तोड़ने में सफल रहा है। आगे और छापेमारी की तैयारी है।

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Published on:
22 Apr 2026 09:35 pm
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