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बिहार में तुगलकी फरमान! ‘नर्सिंग की पढ़ाई करनी है तो शादी भूल जाओ’, नोटिस देख भड़कीं छात्राएं

Sheikhpura GNM Training School Notice: बिहार के हथुआ में स्थित एक जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (जीएनएम) प्रशिक्षण विद्यालय ने छात्रों को शैक्षणिक सत्र के दौरान शादी न करने की सलाह देने वाला नोटिस जारी। बवाल मचने के बाद वापस लेना पड़ा
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पटना

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Shaitan Prajapat

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Updated: 22 Apr 2026, 8:59 PM IST

Sheikhpura GNM Training School Notice

Sheikhpura GNM Training School Notice

Bihar Nursing School Marriage Ban: बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ स्थित जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (जीएनएम) ट्रेनिंग स्कूल ने 16 अप्रैल को एक ऐसा नोटिस जारी किया जिसने पूरे राज्य में तूफान खड़ा कर दिया। नोटिस में साफ लिखा था- सभी छात्राओं को सूचित किया जाता है कि शैक्षणिक सत्र के दौरान विवाह निषिद्ध है। यदि कोई छात्रा इस दौरान शादी करती है तो विभाग को सूचित किया जाएगा और उसकी नामांकन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा।

'शादी की तो कोर्स से बाहर!'

नोटिस पर प्रधानाचार्या मांसी सिंह के हस्ताक्षर और स्कूल की मुहर लगी थी। छात्राओं और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश फैल गया। सोशल मीडिया पर नोटिस वायरल होने के बाद सैकड़ों लोगों ने इसे ‘तुगलकी फरमान’ और महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। कई छात्राओं ने इसे व्यक्तिगत जीवन में दखलंदाजी करार दिया।

नर्सिंग स्कूल के अजीब नियम पर मचा बवाल

आंदोलन तेज होते देख जिला प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। विवाद बढ़ने पर स्कूल प्रबंधन को नोटिस वापस लेना पड़ा। प्रधानाचार्या मांसी सिंह ने बताया कि नोटिस का मकसद शादी रोकना नहीं था। उन्होंने कहा, हमारा इरादा किसी की भावनाएं आहत करना या शादी रोकना नहीं था। समस्या अटेंडेंस की है। कोर्स में 100% क्लिनिकल और 85% थ्योरी अटेंडेंस जरूरी है। शादी के बाद कई छात्राएं अटेंडेंस पूरी नहीं कर पातीं और अभिभावक दबाव बनाते हैं। प्रधानाचार्या ने स्पष्ट किया कि शादी पर कोई औपचारिक सरकारी नियम नहीं है, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए चेतावनी दी गई थी।

भारी विरोध के बाद बैकफुट पर नर्सिंग स्कूल

जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने भी नोटिस को गैर-जरूरी बताया और साफ किया कि छात्राओं के निजी फैसलों में स्कूल हस्तक्षेप नहीं कर सकता। छात्राओं ने राहत की सांस ली है, लेकिन घटना ने नर्सिंग शिक्षा में लड़कियों की चुनौतियों को फिर उजागर कर दिया। कई महिला संगठनों ने कहा कि ऐसे आदेश भविष्य में और समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

यह मामला बिहार में महिला शिक्षा और सशक्तिकरण पर नए सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यावसायिक कोर्स में अनुशासन जरूरी है, लेकिन व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरी तस्वीर साफ होगी।