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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत: कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी करने से किया इनकार, क्या है मामला?

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने पवन खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

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Apr 20, 2026
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा (Photo- DD News)

गुवाहाटी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा (Congress leader Pawan Khera) के खिलाफ दाखिल असम पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने पवन खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि गैर-जमानती वारंट जारी करने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कोर्ट के इस फैसले से पवन खेड़ा को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने यह फैसला 7 अप्रैल को सुनाया गया था, जिसकी प्रति 19 अप्रैल को सार्वजनिक की गई है।

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पवन खेड़ा पर किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?

गुवाहाटी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की असम पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराए गए शिकायती मामले से जुड़ा है। पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को नई दिल्ली और गुवाहाटी में दो प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिंकी शर्मा पर आरोप लगाए थे। इसके बाद 6 अप्रैल को रिंकी ने पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। रिंकी की शिकायत पर पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 175 (चुनाव से संबंधित झूठा बयान), 318 (धोखाधड़ी) और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।

कोर्ट ने असम पुलिस की मांग खारिज की

असम पुलिस ने कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी, लेकिन CJM कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी द्वारा दिए गए आधार पूरी तरह अनुमानों और अटकलों पर आधारित हैं। ये आरोप रिकॉर्ड में उपलब्ध किसी ठोस सामग्री से समर्थित नहीं हैं।

कोर्ट ने आगे कहा कि चूंकि यह संज्ञेय मामला है और अपराध गैर-जमानती हैं, इसलिए जांच अधिकारी को सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार जरूरत पड़ने पर BNSS की धारा 35 के तहत गिरफ्तारी का अधिकार पहले से ही प्राप्त है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस स्तर पर गैर-जमानती वारंट जारी करने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।

क्या है पूरा मामला?

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को नई दिल्ली और गुवाहाटी में दो प्रेस कॉन्फ्रेंस में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sharma) की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि हिमंत बिस्वा शर्मा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा के पास कई पासपोर्ट/गोल्डन कार्ड और विदेश में संपत्ति है। इसका उल्लेख हिमंत बिस्वा शर्मा के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया है।
पवन खेड़ा के आरोपों को रिंकी भुइयां ने गलत और निराधार बताया था। इसके बाद उन्होंने 6 अप्रैल को पवन खेड़ा और अन्य सहयोगियों के खिलाफ गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए अपील की थी। पवन खेड़ा की अपील पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी।

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