
Harbhajan Singh On AAP: आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों का पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए करीब दो महीने का समय हो गया है। लेकिन यह विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। आम आदमी पार्टी की तरफ से लगातार सभी सातों सांसदों पर टिप्पणी की जा रही है। वहीं सांसदों की तरफ से भी पलटवार किया जाता है। इसी कड़ी में अब पूर्व क्रिकेटर और राज्य सभा सांसद हरभजन सिंह सोशल मीडिया पर भड़क गए हैं। दरअसल, सोशल मीडिया साइट 'X' पर एक यूजर ने उनसे पूछा कि जिस पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा, उसी पार्टी के खिलाफ वो बोलते हैं तो उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया। इसपर हरभजन सिंह ने उसका रिप्लाई किया।
इस पर हरभजन सिंह ने सीधे जवाब देते हुए कहा कि सही समय आने पर हर सवाल का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने किसी नेता को गाली नहीं दी और अपनी भाषा खराब करने में विश्वास नहीं रखते। लेकिन इसके बाद उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग उन्हें 'गद्दार' कह रहे हैं, उन्हें पहले अपने नेताओं से पूछना चाहिए कि पंजाब की राज्यसभा सीट आखिर कितने में बेची गई थी। हरभजन सिंह ने आगे लिखा कि अगर पार्टी के लोग खुद जवाब नहीं देंगे तो वह खुद बताएंगे कि किसको कितना चढ़ावा गया था और किसकी तरफ से। और कैसे किसको मंत्री संतरी बनाया गया पंजाब को लूटने के लिए और लाला को माल पहुंचाने के लिए।
एक दूसरे सोशल मीडिया यूजर को जवाब देते हुए हरभजन सिंह ने दावा किया कि उनके घर के बाहर पुतला जलाने और गद्दार' लिखने के पीछे आम लोग नहीं बल्कि एक राजनीतिक पार्टी के लोग थे। उन्होंने कहा कि ऐसे काम आम जनता नहीं करती, बल्कि पार्टी के निर्देश पर किए जाते हैं। उन्होंने बिना नाम लिए अपने जवाब में आम आदमी पार्टी और उनके टॉप लीडरशिप पर निशाना साधा।
आपको बता दें कि हरभजन सिंह 2022 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे और पार्टी ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा था। लेकिन अप्रैल 2026 में पार्टी के भीतर बढ़े विवाद और टूट के बीच उन्होंने राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल समेत कई सांसदों के साथ पार्टी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था।
पूर्व भारतीय स्पिनर ने कहा कि देश ने उन्हें बहुत प्यार दिया है और उन्होंने करीब 20 साल तक मैदान पर भारत का नाम ऊंचा किया। उनके मुताबिक, कुछ लोग सोशल मीडिया पर टैग लगाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आखिर में देश की जनता ही तय करेगी कि उन्हें किस रूप में याद किया जाएगा।