West Bengal Election 2026: सुरक्षा बलों को खुफिया इनपुट मिलने के बाद केंद्र सरकार ने प्रदेश में चुनाव बाद हिंसा रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर केंद्रीय सशस्त्र बल के करीब 70 हजार जवानों को तैनात करने का फैसला किया है।
West Bengal Election 2026 Update:पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान भले ही शांतिपूर्ण हो गया हो लेकिन मतगणना व चुनावी नतीजे आने के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा की आशंका है। सुरक्षा बलों को ऐसा खुफिया इनपुट मिलने के बाद केंद्र सरकार ने प्रदेश में चुनाव बाद हिंसा रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर केंद्रीय सशस्त्र बल के करीब 70 हजार जवानों को तैनात करने का फैसला किया है। सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह ने बताया है कि इसमें सीआरपीएफ की 200, बीएसएफ की 150, सीआईएसएफ की 50, आईटीबीपी की 50 और एसएसबी की 50 कंपनियां तैनात रहेंगी। हिंसा रोकने के लिए समाजकंटकों पर नजर के साथ त्रिस्तरीय सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों को अगले आदेश तक तय क्षेत्र में ही बने रहने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव (2021) के नतीजे आने के बाद हिंसा व आगजनी की करीब 300 घटनाओं में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोगों को घर छोड़कर शिविरों में रहना पड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट की शनिवार को अवकाश के दिन बैठी विशेष बेंच ने टीएमसी की अपील खारिज कर दी। अपील में मतगणना में केंद्र सरकार व केंद्रीय उपक्रमों के अधिकारियों-कर्मचारियों को सुपरवाइजर व सहायक के रूप में अनिवार्य रूप से तैनात करने का विरोध किया गया था। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए चुनाव आयोग (ईसी) को निर्देश दिए कि वह अपने परिपत्र का अक्षरश: व भावना से पालन सुनिश्चित करे। जस्टिस बागची ने कहा कि यह चुनाव आयोग का अधिकार है और परिपत्र में कहा गया है कि मतगणना में केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी हो सकते हैं। टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आयोग के 13 अप्रेल के परिपत्र पर आपत्ति करते हुए कहा कि इसमें गड़बड़ी की आशंका बताई गई जबकि इसके बारे में कोई खुलासा नहीं है। हम चाहते हैं कि हर मतगणना टेबल पर राज्य सरकार का कर्मचारी भी तैनात हो। चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि वोटों की गिनती राज्य सरकार के प्रतिनिधि की मौजूदगी में की जाएगी, वहां उम्मीदवारों के एजेंट रहेंगे और सभी नियमों का पालन किया जाएगा, अपीलार्थी की सभी आशंकाएं निराधार हैं।
पश्चिम बंगाल की मगराहट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के 11 और डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्र के चार मतदान केंद्रों पर शनिवार को पुनर्मतदान में शाम पांच बजे तक 87% वोट पड़े। भारी सुरक्षा बल की तैनाती के चलते पुनर्मतदान के दौरान मोटे तौर पर शांति रही। फलता में भिड़े गुट, पुलिस का लाठीवार
चुनाव आयोग (ईसी) ने शनिवार रात पश्चिम बंगाल की फालता सीट पर दुबारा चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। ईसी के आदेश के अनुसार इस सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर 21 मई को वोट डाले जाएंगे और 24 मई को मतगणना होगी। ईसी ने कहा है कि 29 अप्रेल को वोटिंग में बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर गंभीर चुनावी अपराधों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन को देखते हुए यह आदेश दिए गए हैं। दक्षिण 24 परगना की यह वही सीट है जहां 29 अप्रेल को मतदान के दौरान 30 से अधिक बूथों पर ईवीएम पर भाजपा के निशान पर टेप चिपकाए गए थे और यहां के टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान का ईसी के पुलिस पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा से विवाद हुआ था। सूत्रों के अनुसार इस सीट पर कई बूथों पर ईसी के कैमरे बंद मिले और शत प्रतिशत तक मतदान हुआ। मतदान व उसके बाद यहां तनाव का माहौल है। शनिवार को भी बड़ी संख्या में महिलाओं सहित लोगों ने प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि टीएमसी के नेता उन्हें चुनाव के बाद हिंसा व घर जलाने की धमकी दे रहे हैं। कई लोगों को वोट भी नहीं डालने दिया गया था। सड़कों पर उतरे लोग नारे लगाने लगे तो दूसरे पक्ष के लोग भी वहां एकत्र हो गए और भिड़ंत की नौबत आ गई। पुलिस ने दोनों गुटों को अलग करने के लिए हल्का लाठीवार किया।