Himachal Pradesh Congress Government : केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली हिमाचली प्रदेश सरकार पर राज्य का विकास करने में नाकाम करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार से राशि आने के बावजूद प्रदेश सरकार उसका समय पर उपयोग नहीं कर रही है।

Union Minister JP Nadda : ठंडे प्रदेश हिमाचल की कांग्रेस सरकार पर केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को करारा सियासी हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार पर केंद्रीय सहायता को विकास में तब्दील करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। नड्डा ने कहा कि प्रशासनिक अक्षमता और दूरदर्शिता की कमी के कारण राज्य में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य सेवा और औद्योगिक परियोजनाएं ठप पड़ी हुई हैं। उन्होंने शिमला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले कई बरसों के दौरान हिमाचल प्रदेश को हर संभव सहायता दी है, लेकिन राज्य सरकार केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में विफल रही है।
नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल के दौरान भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, दावा किया कि हिमाचल प्रदेश की जनता ने लगातार तीन आम चुनावों में सभी चार लोकसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों को चुन कर भाजपा के विकासोन्मुखी शासन मॉडल का बार-बार समर्थन किया है। उन्होंने हाल ही में हुए स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि परिणाम राज्य में कांग्रेस सरकार के प्रति बढ़ता जन असंतोष दर्शाते हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता का विवरण देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को विशेष सहायता योजना के तहत 2,381 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के माध्यम से 2,006 करोड़ रुपये और 2024-25 के दौरान बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 2,150 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।
नड्डा ने केंद्र सरकार की राज्य के विकास के प्रति प्रतिबद्धता के उदाहरण के रूप में आईआईएम सिरमौर, IIIT ऊना और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी संस्थाओं और परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि पर्याप्त धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना परियोजनाओं में तेजी लाने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री-आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभिम) के तहत स्वीकृत 15 गहन चिकित्सा केंद्रों में से केवल एक ही पूरा हुआ है। इसी प्रकार, 12 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में से केवल एक ही चालू हुई है, जबकि स्वीकृत 73 ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों में से एक भी पूरी नहीं हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 15वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश को स्वास्थ्य संबंधित परियोजनाओं के लिए आवंटित 521 करोड़ रुपये में से लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल ही नहीं किया गया। नड्डा ने औद्योगिक विकास को लेकर हिमाचल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार की ओर से अक्टूबर 2022 में स्वीकृत बल्क ड्रग पार्क परियोजना को पर्यावरण मंजूरी मिलने में बहुत देरी हुई, जो आखिरकार सितंबर 2025 में मिली। उनके अनुसार, 1,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत केंद्र की ओर से जारी किए गए 225 करोड़ रुपये में से केवल 102.13 करोड़ रुपये का ही इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने राज्य सरकार की इस बात के लिए भी आलोचना की कि उसने फरवरी 2022 में मंजूरी मिलने के बावजूद अक्टूबर 2024 में मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजना से हाथ खींच लिया। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, 30 करोड़ रुपये की पहली किस्त केंद्र को वापस करनी पड़ी, और इस कदम से स्थानीय युवाओं को रोजगार के संभावित अवसरों से वंचित होना पड़ा।
नड्डा ने कांग्रेस सरकार के प्रशासनिक कामकाज पर भी हमला करते हुए आरोप लगाया कि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों का प्रबंधन अतिरिक्त प्रभार के आधार पर किया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि राज्य में प्रशासनिक अस्थिरता देखी जा रही है और कहा कि कांग्रेस सरकार का "व्यवस्था परिवर्तन" का वादा जमीनी स्तर पर साकार होने में विफल रहा है।
नड्डा ने नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए, राज्य के ऋण भार पर चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश का ऋण 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोग जवाबदेही और ठोस विकास परिणामों की मांग कर रहे हैं, और वे लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि केंद्र से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त करने के बावजूद हिमाचल प्रदेश पिछड़ क्यों रहा है। ( इनपुट : ANI )