
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई सांकेतिक तस्वीर। (फोटो-पत्रिका )
हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार युवाओं को नशे की भयानक चपेट से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने की घोषणा की है कि अब सरकारी विभागों में नौकरी पाने से पहले हर उम्मीदवार का डोप टेस्ट जरूरी होगा। यह फैसला चिट्टा (हेरोइन) जैसे घातक नशे के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को प्रशासनिक सचिवों के साथ बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि चिट्टा तस्करी में शामिल सरकारी कर्मचारियों पर पहले ही कार्रवाई चल रही है।
अब पूरे महकमों को निर्देश दिए जाएंगे कि नई भर्तियों में डोप टेस्ट अनिवार्य कर दिया जाए। इस संबंध में शनिवार को सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।
सुक्खू ने जोर देकर कहा कि युवाओं को नशे से बचाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बैठक में पूछा कि चिट्टा तस्करी में पकड़े गए कर्मचारियों पर क्या-क्या एक्शन लिया गया है। राज्य सरकार नशे के माफिया के खिलाफ बड़े पैमाने पर मुहिम चला रही है।
बैठक में सीएम सुक्खू ने क्लास-फोर पेंशनर्स के बकाए पर भी ध्यान दिया। बजट में घोषणा के मुताबिक उनके लंबित ग्रेच्युटी और छुट्टी नकदीकरण (लीव एनकैशमेंट) के पैसे जल्द से जल्द देने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों से कहा कि इस काम में कोई देरी न हो।
इस बीच, राज्य सरकार उन परिवारों के मामलों पर भी तेजी से फैसला लेगी जिनके सदस्य की मौत हो जाने या विकलांग होने के बाद नौकरी मांगी गई है। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों से ऐसे आवेदनों की पूरी डिटेल मांगी है ताकि उचित निर्णय लिया जा सके।
इस बीच, सुक्खू ने सभी विभागों से खाली पड़े पदों की सूची तुरंत मंगाई है। उन्होंने कहा कि इन पदों को जल्द भरा जाएगा। राज्य सरकार ने 500 जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के पद भरने का फैसला किया है।
बैठक में मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव केके पंत, ओंकार चंद शर्मा, प्रधान सचिव देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, आशीष सिंहमार समेत कई प्रशासनिक सचिव मौजूद रहे।
Published on:
30 May 2026 02:47 pm
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