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Bihar Politics: मंत्री बने रहेंगे या छोड़ेंगे पद?, जानें दीपक प्रकाश को BJP ने क्यों किया साइडलाइन

बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एनडीए ने उन्हें बिहार विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया, जिससे उनके मंत्री पद पर संकट की चर्चा तेज हो गई है।
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पटना

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Rajesh Kumar Ojha

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Updated: 8 Jun 2026, 6:57 PM IST

दीपक प्रकाश

दीपक प्रकाश

Bihar Politics सम्राट सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। यह चर्चा बीजेपी की ओर से उनको बिहार विधान परिषद के टिकट नहीं मिलने के बाद शुरू हुई है। बीजेपी के इस फैसले के बाद दीपक प्रकाश का मंत्री पद पर भी खतरा मंडराने लगे है। बिना किसी सदन के दोबारा मंत्री बनने को लेकर पहले मामल देश के देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने अपनी याचिका में दावा किया है कि दीपक प्रकाश वर्तमान में न तो बिहार विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। बावजूद इसके उन्हें दोबारा मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है, जो संविधान की भावना और प्रावधानों के विपरीत है।

दीपक प्रकाश पर बढ़ा संकट

पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा से जब उनके बेटे दीपक प्रकाश को एमएलसी उम्मीदवार नहीं बनाए जाने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "इसका जवाब आप उन लोगों से पूछिए।" उन्होंने आगे कहा कि "जब तक एनडीए चाहेगा, दीपक प्रकाश मंत्री बने रहेंगे। जब किसी सदन की सदस्यता दिलाने की आवश्यकता होगी, उन्हें सदस्यता दिला दी जाएगी।"

बिहार विधान परिषद की खाली हो रही 10 सीटों के लिए नामांकन का सोमवार को अंतिम दिन था। उपेंद्र कुशवाहा और उनके बेटे दीपक प्रकाश को आखिरी समय तक उम्मीद थी कि एनडीए की ओर से उन्हें विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया जाएगा, लेकिन अंततः ऐसा नहीं हुआ। इससे बिहार के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

कुशवाहा को बीजेपी का सियासी संदेश?

सूत्रों के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव के बाद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का बीजेपी में विलय होना था। हालांकि, उन्होंने इस प्रक्रिया को लगातार टालना शुरू कर दिया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी ने इसे अपनी बात से पीछे हटना माना और उसी के परिणामस्वरूप उन्हें यह राजनीतिक संदेश दिया गया। माना जा रहा है कि इसी वजह से उनके पुत्र एवं पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद का टिकट नहीं मिला, जिससे अब उनके मंत्री पद पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा ने साफ कहा है कि वह अंतिम समय तक एनडीए के साथ बने रहेंगे। उनके मुताबिक, पद और टिकट उनके राजनीतिक संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते। लेकिन, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार एनडीए के भीतर मतभेदों का दौर शुरू हो चुका है। इसकी झलक रविवार को तब भी देखने को मिली, जब उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उनकी विचारधारा जेडीयू से अधिक मेल खाती है। इस बयान के बाद बिहार की सियासत में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

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