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असम की पहचान खतरे में! CM सरमा का बड़ा खुलासा- ‘40% आबादी अब बाहरी मूल की, जल्द करना होगा इलाज’

हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में बीजेपी की राज्य कार्यकारिणी बैठक और मीडिया से बातचीत में कहा कि 2011 की जनगणना में मुस्लिम आबादी 34% थी, जिसमें से 31% बांग्लादेशी मूल के थे।
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Jan 29, 2026
Himanta Biswa Sarma
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Photo - IANS)

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की जनसांख्यिकीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया कि असम की कुल आबादी का लगभग 40% हिस्सा अब बांग्लादेशी मूल का है, जो राज्य की असमिया पहचान, संस्कृति और भूमि के लिए खतरा बन रहा है। सरमा ने कहा कि अगर यह आंकड़ा 50% पार कर गया तो असम को बांग्लादेश में शामिल करने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने इसे 'सिविलाइजेशनल बैटल' करार देते हुए अगले 30 वर्षों तक ध्रुवीकरण की राजनीति जारी रखने की आवश्यकता बताई।

जनसांख्यिकीय बदलाव का दावा

सरमा ने हाल ही में बीजेपी की राज्य कार्यकारिणी बैठक और मीडिया से बातचीत में कहा कि 2011 की जनगणना में मुस्लिम आबादी 34% थी, जिसमें से 31% बांग्लादेशी मूल के थे। उन्होंने अनुमान लगाया कि 2027 की जनगणना में बांग्लादेशी मूल की मुस्लिम आबादी 40% तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा, मेरी जिंदगी में मैंने देखा है कि घुसपैठियों की आबादी 21% से बढ़कर लगभग 40% हो गई है। मेरे बच्चों की जिंदगी में असमिया समुदाय की आबादी 30% रह जाएगी।"

सरमा ने कांग्रेस पर दशकों की 'तुष्टीकरण की राजनीति' का आरोप लगाया, जिससे 'नई सभ्यता' बनी और आबादी 1.5 करोड़ तक पहुंच गई। उन्होंने 'love jihad', 'land jihad' और 'flood jihad' जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए असमिया लोगों की 'जाति, माटी और भेटी' (पहचान, भूमि और घर) की रक्षा का आह्वान किया।

'इलाज' की जरूरत और ध्रुवीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि असम अब polarized समाज है और जीवित रहने के लिए ध्रुवीकरण की राजनीति करनी होगी। उन्होंने BJP कार्यकर्ताओं को चुनावी रोल्स में 'Miyas' (बंगाली-भाषी मुसलमानों) के खिलाफ Form 7 objections दाखिल करने का निर्देश दिया, ताकि वे परेशान हों और राज्य छोड़ दें। सरमा ने कहा, 'जहां संभव हो, Form 7 भरें… उन्हें थोड़ा दौड़ना पड़े, परेशान हों, ताकि वे समझें कि असमिया लोग अभी जीवित हैं।"

उन्होंने रोजमर्रा की परेशानी का उदाहरण देते हुए कहा कि रिक्शा का किराया 5 रुपये हो तो 4 रुपये दें। सरमा ने स्पष्ट किया कि यह 'बांग्लादेशी घुसपैठियों' और मध्यस्थों के लिए है, न कि गरीब या मूल निवासी मुसलमानों के लिए।

Updated on:
29 Jan 2026 07:23 pm
Published on:
29 Jan 2026 07:22 pm