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ED कार्रवाई के एक दिन बाद I-PAC की पहली प्रतिक्रिया, जानें छापेमारी को लेकर क्या कहा

छापेमारी के दूसरे दिन 9 जनवरी को I-PAC ने बयान जारी कर कहा, 'कल ED अधिकारियों ने हमारे कोलकाता कार्यालय और निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर खोज की।

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I-PAC के दफ्तर पर पड़ा छापा

ED VS Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद राजनीतिक परामर्श कंपनी I-PAC (Indian Political Action Committee) ने पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। 8 जनवरी को ED ने कोलकाता में I-PAC के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की, जो कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद घटनास्थल पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया और 'ग्रीन फाइल्स' सहित महत्वपूर्ण दस्तावेज ले गईं, जिससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

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I-PAC का पहला बयान: 'अनसेटलिंग प्रेसिडेंट'

छापेमारी के दूसरे दिन 9 जनवरी को I-PAC ने बयान जारी कर कहा, 'कल ED अधिकारियों ने हमारे कोलकाता कार्यालय और निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर खोज की। यह एक पेशेवर संगठन के लिए कठिन और दुर्भाग्यपूर्ण दिन था। हमारा मानना है कि इससे गंभीर चिंताएं उठती हैं और एक अनसेटलिंग प्रेसिडेंट (अशुभ मिसाल) सेट होता है। कंपनी ने जोर दिया कि उसने कानून के अनुसार पूर्ण सहयोग किया है और आगे भी ऐसा ही करेगी।

I-PAC ने अपनी भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह 'पारदर्शी और पेशेवर राजनीतिक परामर्श' प्रदान करती है, जिसमें कोई राजनीतिक विचारधारा प्रभावित नहीं होती। कंपनी ने कई दलों के साथ काम करने का जिक्र किया, जैसे BJP, कांग्रेस, AAP, TMC, DMK, YSRCP, BRS, JD(U), शिव सेना आदि। बयान में कहा गया, 'हम चुनाव नहीं लड़ते या राजनीतिक पद नहीं संभालते। हमारा काम पेशेवर सलाह तक सीमित है।'

छापेमारी का बैकग्राउंड और ममता का हस्तक्षेप

ED ने 10 स्थानों (कोलकाता में 6 और दिल्ली में 4) पर छापेमारी की, जिसमें कोयला तस्करी सिंडिकेट के सरगना अनूप माझी से जुड़े हवाला लेन-देन शामिल हैं। जांच में दावा किया गया कि कोयला घोटाले से प्राप्त करोड़ों रुपये I-PAC को हवाला के जरिए पहुंचे, खासकर 2022 गोवा चुनाव में TMC के काम के लिए। ED ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने शांतिपूर्ण छापेमारी में बाधा डाली और 'कुंजी साक्ष्य' जब्त कर लिया, जिसमें फिजिकल दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस शामिल हैं।

ममता बनर्जी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और कहा, 'ED BJP का राजनीतिक उपकरण है, जो TMC की आंतरिक रणनीति चुराना चाहता है।' उन्होंने अमित शाह को 'नॉटी होम मिनिस्टर' कहा और दावा किया कि वे TMC की अध्यक्ष के रूप में गई थीं। उन्होंने 10 किमी लंबी विरोध रैली निकाली, जिसमें TMC कार्यकर्ता और बंगाली फिल्मी हस्तियां शामिल हुईं।

राजनीतिक प्रभाव और हाई कोर्ट में जंग

यह घटना 2026 बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई है, जिससे TMC की चुनावी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट में राज्य सरकार के खिलाफ याचिका दायर की, जबकि TMC और I-PAC ने भी कानूनी कदम उठाए। BJP ने ममता पर साक्ष्य नष्ट करने का आरोप लगाया।

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Published on:
09 Jan 2026 09:51 pm
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