इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, एआई बिजली चोरी रोकने, ग्रीन एनर्जी मैनेजमेंट और बायोफ्यूल उत्पादन बढ़ाने में प्रभावी साबित हो रहा है। 2035 तक 13 एक्साजूल ऊर्जा बचत का अनुमान जताया गया है।
दुनिया इस समय जलवायु परिवर्तन और बढ़ती ऊर्जा मांग के दोहरे संकट से जूझ रही है। एक ओर कार्बन उत्सर्जन कम करने का दबाव है, तो दूसरी ओर बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और भारत सरकार द्वारा इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में जारी ‘केसबुक ऑन एआई इन एनर्जी’ में दावा किया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही उपयोग ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, एआई न केवल अरबों रुपये की बचत कर सकता है, बल्कि धरती को बचाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत में बिजली वितरण के दौरान होने वाला नुकसान और चोरी एक बड़ी चुनौती है। रिपोर्ट में ‘प्रवाह’ नामक स्वदेशी एआई टूल का उल्लेख किया गया है। यह टूल कंप्यूटर विजन और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करके बिजली खपत का विश्लेषण करता है। यह ऊपर से देखता है कि किस इलाके में कितने घर हैं और वहां कितनी बिजली खपत होनी चाहिए। अगर मीटर की रीडिंग और एआइ के अनुमान में बड़ा अंतर आता है, तो यह तुरंत बिजली विभाग को अलर्ट भेजता है। महाराष्ट्र और दिल्ली के कुछ क्षेत्रों में इसके परीक्षण से बिजली चोरी पकड़ने में सफलता मिली है। इससे बिजली कंपनियों का राजस्व बढ़ा है और ईमानदार उपभोक्ताओं पर टैरिफ का बोझ कम होने की उम्मीद जताई गई है।
सौर और पवन ऊर्जा पर्यावरण के अनुकूल हैं, लेकिन उनकी अनिश्चितता पावर ग्रिड के लिए जोखिम बनती है। बादल या हवा की कमी से उत्पादन घटता है और ग्रिड फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। केस स्टडी में ‘स्मार्ट ग्रिड एनालिटिक्स’ का जिक्र है, जो मौसम के लाखों डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण कर 95 प्रतिशत सटीकता से अगले 24 घंटे की सौर ऊर्जा उत्पादन का पूर्वानुमान देता है। इससे ग्रिड ऑपरेटर पहले से तैयारी कर लेते हैं और बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होती। कर्नाटक में इस तकनीक का सफल प्रयोग देखा गया है, जिससे ग्रीन एनर्जी को भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत बायोफ्यूल उत्पादन पर जोर दे रहा है। रिपोर्ट में ‘बायोलूप’ तकनीक का उल्लेख है, जिसने बायोमास से ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाया है। एआई की निगरानी में चलने वाले रिएक्टर्स ने बायोफ्यूल उत्पादन क्षमता को 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। इससे किसानों के कृषि अपशिष्ट जैसे पराली को बेहतर मूल्य मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2035 तक एआई के उपयोग से वैश्विक स्तर पर 13 एक्साजूल ऊर्जा की बचत संभव है, जो इंडोनेशिया जैसे बड़े देश की कुल ऊर्जा खपत से भी अधिक है। सीमेंट और स्टील इंडस्ट्री में भी एआई सेंसर ऊर्जा बर्बादी कम कर रहे हैं।