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चीनी नहीं, अब ‘कोरियाई’ निकला गलगोटिया का रोबोट! नया खुलासा होने के बाद सोशल मीडिया पर मची खलबली

Galgotia University Controversy: गलगोटिया यूनिवर्सिटी का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले चीनी रोबोटिक डॉग ‘ओरियन’ को अपना बताकर फजीहत झेलने के बाद अब यूनिवर्सिटी के एक और प्रोडक्ट ‘सॉकर ड्रोन’ पर सवाल खड़े हो गए हैं। खुलासा हुआ है कि यह ड्रोन भी मूल रूप से दक्षिण कोरिया का है, न […]

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Galgotia University controversy

Galgotia University controversy

Galgotia University Controversy: गलगोटिया यूनिवर्सिटी का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले चीनी रोबोटिक डॉग 'ओरियन' को अपना बताकर फजीहत झेलने के बाद अब यूनिवर्सिटी के एक और प्रोडक्ट 'सॉकर ड्रोन' पर सवाल खड़े हो गए हैं। खुलासा हुआ है कि यह ड्रोन भी मूल रूप से दक्षिण कोरिया का है, न कि यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित। इस नए खुलासे ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है, जहां यूजर्स यूनिवर्सिटी की 'इनोवेशन' पर जमकर सवाल उठा रहे हैं।

नेहा सिंह का वीडियो वायरल

दरअसल, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के पवेलियन में कम्युनिकेशन प्रोफेसर नेहा सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ। नेहा सिंह पहले रोबोडॉग विवाद में भी चर्चा में थीं। उन्होंने डीडी न्यूज के रिपोर्टर को बताया कि यह 'सॉकर ड्रोन' बहुत इंट्रेस्टिंग है। नेहा ने दावा किया, 'इसका एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर ऐप्लीकेशन सबकुछ यूनिवर्सिटी में हुआ है। यह भारत का पहला ड्रोन सॉकर एरिना है, जो गलगोटिया के ऑन कैंपस देखने को मिलेगा। यहां बच्चे गेम खेलते हैं, फ्लाई करते हैं। नए तरीके से और मजबूती से फीचर्स के साथ डेवलप कर रहे हैं।'

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स ने इसकी गहराई से जांच की। जल्द ही पता चला कि यह ड्रोन हेलसेल ग्रुप (Helsel Group) द्वारा बनाया गया साउथ कोरियाई प्रोडक्ट है, जो कमर्शियली उपलब्ध है। एक वेबसाइट पर यह लगभग 40 हजार रुपये में मिल रहा है। यूथ कांग्रेस सहित कई यूजर्स ने इसे 'स्ट्राइकर वी3 एआरएफ' जैसा बताया और यूनिवर्सिटी पर फिर से फर्जी दावे करने का आरोप लगाया।

चीनी रोबोट 'ओरियन' पर गहराया विवाद

यह विवाद चीनी रोबोट 'ओरियन' (Unitree Go2 मॉडल) के बाद आया है, जिसे यूनिवर्सिटी ने 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' द्वारा विकसित बताया था। बाद में खुलासा हुआ कि यह भी चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का कमर्शियल प्रोडक्ट है। इस पर भारी ट्रोलिंग हुई, चीनी मीडिया ने भी यूनिवर्सिटी को निशाना बनाया।

सरकार ने खाली करवाई पवेलियन

बढ़ते विवाद को देखते हुए सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए यूनिवर्सिटी को समिट से पवेलियन खाली करने का आदेश दिया। बिजली सप्लाई बंद कर दी गई है और स्टाफ को हटाया गया। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने साफ कहा, 'सरकार नहीं चाहती कि कोई प्रदर्शक ऐसी वस्तुओं का प्रदर्शन करे जो उसकी अपनी न हों। किसी दूसरे के बनाए उत्पाद को अपना मौलिक बताना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने दी सफाई

हालाकिं गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने रोबोडॉग मामले में सफाई दी कि उन्होंने कभी दावा नहीं किया कि रोबोट बनाया है, बल्कि छात्रों के लिए खरीदा गया था। प्रोफेसर नेहा सिंह ने कहा, आपका 6 मेरे लिए 9 हो सकता है, और इसे मिसइंटरप्रिटेशन बताया।