
Crime Report: देश में जब भी सुरक्षा की बात आती है, तो अक्सर बड़े शहरों और आर्थिक रूप से मजबूत राज्यों को बेहतर माना जाता है। लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट इस धारणा को काफी हद तक बदल देती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानून-व्यवस्था हमेशा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रमुख छवि रही है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2022 से 2024 के बीच हत्या, अपहरण, बलात्कार और दंगों जैसे कई गंभीर अपराधों में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि ये आंकड़े केवल दर्ज मामलों को दर्शाते हैं, फिर भी ये राज्य में कानून-व्यवस्था की दिशा और अपराध नियंत्रण में आए बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत देते हैं।
उत्तर प्रदेश को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस लगातार जारी रहती है, लेकिन NCRB के आंकड़े बताते हैं कि राज्य ने कई गंभीर अपराध श्रेणियों में गिरावट दर्ज की है। उत्तर प्रदेश में दंगों के मामलों में 41.7% की गिरावट आई है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह गिरावट 19.8% रही। अपहरण और किडनैपिंग के मामले 25.2% की कमी। वहीं दुष्कर्म के मामले 13% की गिरावट दर्ज हुई है। हत्या के मामलों में हल्की बढ़ोतरी दिखी लेकिन कुल मिलाकर 7.8% की गिरावट रही।
यूपी में दंगों में कमी राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी ज्यादा तेज रही और प्रति लाख जनसंख्या के हिसाब से यूपी में दंगे 1.1 हैं जबकि भारत में यह 2.2 है।
NCRB के अनुसार भारत में अपराध दर राज्यवार काफी अलग है। केरल, दिल्ली, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्य उच्च रिपोर्टिंग और शहरीकरण के कारण ऊपर स्थान पर दिखते हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र मध्यम-उच्च श्रेणी में आते हैं। वहीं नागालैंड, सिक्किम, मेघालय, मिजोरम और पूर्वोत्तर के कुछ छोटे राज्य अपेक्षाकृत कम अपराध दर दर्ज करते हैं। दादरा-नगर हवेली और छोटे UT में जनसंख्या कम होने से दर कम दिखाई देती है।
NCRB रिपोर्ट के अनुसार 2024 में भारत में कुल 58.86 लाख संज्ञेय अपराध दर्ज हुए, जो 2023 की तुलना में 6.0% कम हैं। अपराध दर भी 448.3 से घटकर 418.9 प्रति लाख हो गई। राज्यों में केरल में सबसे अधिक 1,389 और नागालैंड में सबसे कम 61.6 अपराध प्रति लाख दर्ज हुए। महिलाओं के खिलाफ अपराध भी 1.5% घटकर 4.41 लाख रह गए।
NCRB रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार तेलंगाना में अपराधों की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई है और यह सबसे ज्यादा अपराध दर वाले राज्यों में शामिल हो गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश में प्रति लाख लोगों पर अपराध दर सबसे अधिक (7.4) दर्ज की गई, इसके बाद अरुणाचल प्रदेश और झारखंड का स्थान रहा। वहीं नागालैंड में देश में सबसे कम अपराध दर दर्ज की गई। चार्जशीट दाखिल करने के मामले में केरल, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल सबसे आगे रहे, जहां जांच प्रक्रिया ज्यादा सक्रिय पाई गई।
छोटे राज्य और पूर्वोत्तर राज्यों का अपराध रैंकिंग में ऊपर दिखना उनकी वास्तविक सुरक्षा से ज्यादा रिकॉर्डिंग सिस्टम और जनसंख्या संरचना से जुड़ा है। केंद्र शासित दादरा और नगर हवेली तथा दमन-दीव 72.9 की दर के साथ शीर्ष पर हैं क्योंकि छोटे क्षेत्र में हर घटना आसानी से दर्ज हो जाती है। नागालैंड, सिक्किम और मेघालय जैसे राज्यों में घनिष्ठ समुदाय और कम आबादी के कारण अपराध दर आमतौर पर 200 से नीचे रहती है।