
विदेश में बैठकर मोस्ट-वांटेड गैंगस्टर्स का भारत में बढ़ता अपराध! (फाइल फोटो: पत्रिका)
Organized Crime Syndicate: कभी अपराधी पुलिस से बचने के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य भागते थे, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। भारत के कई मोस्ट वांटेड गैंगस्टर हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका और कनाडा में बैठकर हत्या, रंगदारी, ड्रग्स तस्करी और धमकी जैसे अपराधों को कथित तौर पर संचालित कर रहे हैं।
अमेरिकी मैगजीन ‘न्यूजवीक’ की एक रिपोर्ट ने इस अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क की परतें खोलते हुए बताया है कि कैसे कुछ भगोड़े विदेशों के इमिग्रेशन सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर सुरक्षित ठिकाने बना रहे हैं और वहीं से अपने गिरोह चला रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कई संदिग्ध अपराधी पहले स्टूडेंट वीजा या अन्य कानूनी रास्तों से उत्तर अमेरिका पहुंचे। बाद में उन्होंने शरण के लिए आवेदन किया या इमिग्रेशन प्रक्रियाओं का लाभ उठाया। एक पूर्व अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी अधिकारी के मुताबिक, शुरुआत में उनका मकसद स्थानीय लोगों को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि भारत में अपराध करने के लिए एक सुरक्षित ठिकाना तैयार करना था।
बता दें असाइलम का मतलब है- जब कोई व्यक्ति अपने देश में युद्ध, हिंसा, या उत्पीड़न (नस्ल, धर्म, राष्ट्रीयता, राजनीतिक विचारों के कारण) से जान बचाकर किसी दूसरे देश में शरण मांगता है, तो उसे 'असाइलम' कहते हैं
रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका या कनाडा के किसी शहर में बैठे गैंगस्टर भारत में हत्या, वसूली से लेकर नारकोटिक्स स्मगलिंग और टेरर, किडनैपिंग से जुड़ी वारदातों को भी आसानी से आदेश दे सकते हैं। उन्हें इस बात का डर भी नहीं है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लंबी और जटिल है, जबकि शरण संबंधी मामलों में कानूनी लड़ाई वर्षों तक चल सकती है। इसी वजह से कानून की पकड़ से दूर रहकर वे अपने नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नेटवर्कों ने अपराध का तरीका भी बदल दिया है। अब एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन और विदेशी हैंडलर्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इससे गैंग के सरगनाओं की सीधी भूमिका छिपी रहती है, जबकि स्थानीय स्तर पर अपराध को अंजाम दिया जाता है।
रिपोर्ट में लॉरेंस बिश्नोई, अनमोल बिश्नोई, गोल्डी बराड़, अर्श डाला समेत कई नामों का उल्लेख किया गया है, जिन पर भारत में हत्या, रंगदारी, ड्रग्स तस्करी और अन्य गंभीर मामलों के आरोप हैं। हालांकि रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि आरोप तब तक आरोप ही माने जाते हैं, जब तक अदालत कोई फैसला न दे।
हरियाणा एसटीएफ के आईजी बी. सतीश बालन के अनुसार, ये गैंग अब नए ढंग से क्राइम का तरीका अपना रहे हैं। भारत, अमेरिका और कनाडा की एजेंसियां इन नेटवर्कों पर शिकंजा कसने के लिए सहयोग बढ़ा रही हैं, लेकिन कानूनी और प्रत्यर्पण संबंधी बाधाएं अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
Published on:
09 Jun 2026 02:42 pm
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