
India first geothermal wells: भारत ने क्लीन और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में आज एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) विनय कुमार सक्सेना ने पूगा वैली में भारत के पहले और सबसे गहरे जियोथर्मल कुओं का अनावरण किया। ONGC एनर्जी सेंटर द्वारा रिकॉर्ड समय में बनाए गए ये दोनों कुएं लद्दाख में भारत का पहला जियोथर्मल पावर प्लांट स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह दोनों कुएं हिमालय में 14000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर जमीन के नीचे की जियोलॉजिकल हलचल के बीच 1,000 मीटर की गहराई तक सफलतापूर्वक खोदे गए। ये दो कुएं पूगा वैली में प्रस्तावित 1 MW (MWe) के पायलट जियोथर्मल पावर प्रोजेक्ट की नींव हैं। यह भारत का पहला डेमोंस्ट्रेशन-स्केल जियोथर्मल पावर प्रोजेक्ट होगा, जिससे देश इस सेक्टर में टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा।
कुएं के उदघाटन के बाद लेफ्टिनेंट गवर्नर वी.के. सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर गर्व जताते हुए लिखा ,"यह भारत की ग्रीन और रिन्यूएबल एनर्जी की यात्रा में एक ऐतिहासिक पल है। हमारी इंजीनियरिंग टीमों ने खराब मौसम और मुश्किल जमीन के नीचे की स्थितियों का सामना करते हुए रिकॉर्ड समय में इन कुओं की ड्रिलिंग पूरी की। यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल हमारी एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करेगी, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्बन-न्यूट्रल लद्दाख के विजन और नेट-ज़ीरो इंडिया के लक्ष्य के करीब ले जाएगी।"
पारंपरिक सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी के उलट, जियोथर्मल एनर्जी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह लगातार, बिना रुकावट दिन में 24 घंटे और साल में 365 दिन बिजली बना सकती है। जबकि सोलर प्लांट रात में काम नहीं करते हैं और विंड फार्म को खास हवा की स्पीड की जरूरत होती है, लेकिन धरती की कुदरती अंदरूनी गर्मी से चलने वाले जियोथर्मल प्लांट पूरे साल चौबीसों घंटे चालू रह सकते हैं।
लद्दाख जैसे दूर और बहुत ठंडे इलाके के लिए यह टेक्नोलॉजी किसी वरदान से कम नहीं है। सर्दियों के लंबे महीनों में जब भारी बर्फबारी से सोलर पावर जेनरेशन बहुत कम हो जाता है, तो यह प्लांट लोकल कम्युनिटी, जरूरी इंडियन आर्मी आउटपोस्ट और टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बिना रुकावट बिजली सप्लाई करेगा। इससे लद्दाख की महंगे और प्रदूषण फैलाने वाले डीजल जनरेटर पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
पर्यावरण के नजरिए से जियोथर्मल पावर का कार्बन फुटप्रिंट अन्य सभी एनर्जी सोर्स में सबसे कम होता है। यह कोयले या नैचुरल गैस प्लांट की तुलना में काफी कम ग्रीनहाउस गैसें निकालता है। इसके अलावा इसके लिए बड़े सोलर पार्क या विंड फार्म की तुलना में बहुत कम जमीन की जरूरत होती है। 2070 तक नेट-ज़ीरो एमिशन हासिल करने के भारत के बड़े लक्ष्य को देखते हुए, यह टेक्नोलॉजी देश के क्लीन एनर्जी टारगेट को पाने में अहम भूमिका निभाएगी।
स्ट्रेटेजिक अहमियत के बावजूद इस जियोथर्मल पावर प्रोजेक्ट को एक बड़े संकट का सामना करना पड़ा था। लद्दाख एडमिनिस्ट्रेशन, LAHDC लेह और ONGC एनर्जी सेंटर के बीच तीन-तरफा मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) की वैलिडिटी खत्म हो गई थी। इससे प्रोजेक्ट का काम पूरी तरह रुक गया और कई महीनों की देरी हुई।
भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए प्रोजेक्ट की अहमियत को समझते हुए, लेफ्टिनेंट गवर्नर वी.के. सक्सेना ने खुद इस मामले में दखल दिया। उनकी कोशिशों की वजह से इस जून में MoU को और पांच साल के लिए रिन्यू किया गया। काम तेजी से फिर से शुरू हुआ, जिससे आज इन दो कुओं को चालू कर दिया गया। इस उद्घाटन समारोह में कई सीनियर अधिकारी शामिल हुए।