
स्पाइसजेट की फ्लाइट। (Photo: IANS/File)
SpiceJet Dark Patterns: सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने स्पाइसजेट पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना ग्राहकों को गुमराह करने और अपने फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर धोखे से उनकी सहमति लेने के लिए लगाया गया है। CCPA की चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा ने स्पाइसजेट के इस डिजाइन सिस्टम को उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन माना है।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "उपभोक्ता की पसंद जानकारी पर आधारित होनी चाहिए, न कि हेरफेर से तय होनी चाहिए। CCPA ने स्पाइसजेट एयरलाइंस पर अपने फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर गुमराह करने वाले डार्क पैटर्न का इस्तेमाल करने के लिए जुर्माना लगाया है और एयरलाइन को डिफ़ॉल्ट-सहमति वाले तरीकों को हमेशा के लिए बंद करने का निर्देश दिया है।" उन्होंने कहा कि उपभोक्ता की सहमति हमेशा स्पष्ट, जानकारीपूर्ण और स्वेच्छा से दी गई होनी चाहिए।
CCPA ने अपनी जांच में SpiceJet के बुकिंग प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न की पहचान की, जिनका इस्तेमाल ग्राहकों को उनकी स्पष्ट मंशा के बिना प्रभावित करने के लिए किया जाता था। टिकट बुकिंग के दौरान प्लेटफॉर्म पर पहले से टिक किए गए चेकबॉक्स के जरिए ग्राहकों को अपने-आप 'स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम' में शामिल कर लिया जाता था।
इसके अलावा, जांच में यह भी पता चला कि कंपनी ने पसंदीदा विकल्पों को डिफ़ॉल्ट विकल्प के तौर पर सेट किया था, जिससे ग्राहकों की स्वतंत्र फैसला लेने की क्षमता पर असर पड़ता था। प्लेटफॉर्म पर कस्टमर से सहमति लेने के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो आसानी से उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता था।
हैरानी की बात यह है कि CCPA द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद भी, कंपनी ने अपने तरीके को बदलकर नए चेकबॉक्स के जरिए टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सएप और ईमेल पर प्रमोशनल मैसेज भेजने का अपना पुराना तरीका नए रूप में जारी रखा।
सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट ने तर्क दिया कि पूरी समस्या एक तकनीकी खराबी के कारण हुई थी। हालांकि अथॉरिटी को यह तर्क संतोषजनक नहीं लगा। CCPA ने एयरलाइन से एक लिखित अंडरटेकिंग लिया जिसमें कहा गया कि सभी सुधारात्मक उपाय स्थायी रूप से लागू कर दिए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।
अपने आदेश में अथॉरिटी ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसा व्यवहार कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019, कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स 2020 के नियम 4(9) और डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन के लिए गाइडलाइंस 2023 का उल्लंघन है। CCPA ने कहा कि पहले से टिक किए गए चेकबॉक्स या डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स के जरिए ली गई सहमति कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
Updated on:
17 Jul 2026 07:56 pm
Published on:
17 Jul 2026 07:33 pm
