
Gold Mines In India: भारत में अभी कर्नाटक की हट्टी गोल्ड माइन्स से ही सोने का उत्पादन होता है। सबसे प्रसिद्ध सोने की खान कोलार गोल्ड फील्ड (केजीएफ) 2001 में बंद कर दी गई। वहीं अब आंध्र प्रदेश के कुरनूल में जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट से सोने का उत्पादन शुरू हो गया है। यह देश की दूसरी सक्रिय गोल्ड माइन बन गई है। जहां पहले साल 400 किलो सोने का उत्पादन होगा। जिसे आगे बढ़ाया जाएगा। हाल में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने प्राइवेट सेक्टर की सोने की खान का लोकार्पण किया। ईसा पूर्व तीसरी सदी में यहां पर सम्राट अशोक के समय इस सोने की खान से सोने का उत्पादन किया जाता था। पास के एर्रागुडी गांव में मौर्य काल के शिलालेख इसकी पुष्टि करते हैं।
राज्य सरकार को इस खान से 400 किलो सोना उत्पादन पर 57 करोड़ रुपए प्रति वर्ष रॉयल्टी मिलेगी। उत्पादन 900 किलोग्राम होने पर रॉयल्टी बŽ 144 करोड़ रुपए तक हो जाएगी। प्रोजेक्ट से 700 लोगों को सीधा रोजगार मिलेगा। रॉयल्टी सोने के कुल मूल्य का 4 प्रतिशत होगी।
जोन्नागिरी में लगभग 13.1 टन सोने का प्रमाणित भंडार है। 1500 एकड़ क्षेत्र के इस प्रोजेक्ट में पहले चरण में 600 एकड़ में सोने का उत्पादन शुरू हुआ है। देश की एकलौती प्राइवेट सक्रिय गोल्ड माइन का संचालन जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्रा.लि., डेक्कन गोल्ड माइंस लि. और त्रिवेणी अर्थमूवर्स ने साझेदारी से चलाया है। इस खान से निकलने वाला सोना देश में होने वाले कुल उत्पादन का 20 प्रतिशत होगा।
दुनिया की ज्यादातर सोने की खदानों से सोना प्राप्त करने के लिए बड़ी मात्रा में चट्टानों व अयस्क की खुदाई कर उन्हें पीसा जाता है। एक टन अयस्क से आम तौर पर एक से छह ग्राम तक सोना निकलता है।उच्च श्रेणी की खदानों में एक टन अयस्क से 10 से 40 ग्राम सोना भी मिल सकता है।
राजस्थान के बांसवाड़ा में भी सोने के भंडार का पता लगने के बाद 2024 में पहली छोटी खदान जगपुरा-भूकिया की निलामी की गई है। जिले के 9.4 वर्ग किमी क्षेत्र में 222.39 टन सोने के भंडार होने का पता चला है।