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Green Hydrogen Mission को लेकर भारत सरकार का बड़ा कदम, BPCL और HPCL समेत 4 रिफाइनरियों को मिली 30 KTPA प्रोडक्शन कैपेसिटी

Green Hydrogen Mission Update: केंद्र सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत चार प्रमुख रिफाइनरियों को 30 KTPA क्षमता दी है। भारत 2030 तक हर साल 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन कैपेसिटी बनाना चाहता है।
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Aug 11, 2026
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2030 के Green Hydrogen लक्ष्य की ओर बड़ा कदम। 4 रिफाइनरियों को मिली 30 KTPA क्षमता। फोटो में पीएम मोदी। (सोर्स: ANI)

Green Hydrogen Mission Latest Update: भारत अब ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत देश की चार प्रमुख ऑयल रिफाइनरियों को कुल 30 किलो टन प्रति वर्ष (KTPA) ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन क्षमता दी गई है। इसका मकसद देश में स्वच्छ ईंधन का उत्पादन बढ़ाना है। साथ ही विदेशों से आने वाली फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करना भी लक्ष्य है।

चार बड़ी रिफाइनरियों को मिली क्षमता

न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मिनिस्ट्री के मुताबिक, यह आवंटन NGHM की SIGHT मोड-2B स्कीम के तहत किया गया है। इसमें चार सरकारी ऑयल कंपनियां शामिल हैं। इनमें ‘इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन’ की पानीपत रिफाइनरी को 10 KTPA क्षमता मिली है। ‘भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन’ की बीना रिफाइनरी को 5 KTPA आवंटित की गई है। ‘हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन’ की विजाग रिफाइनरी को भी 5 KTPA क्षमता मिली है। इसके अलावा, ‘नुमालीगढ़ रिफाइनरी’ को 10 KTPA क्षमता दी गई है। इस तरह चारों रिफाइनरियों को मिलाकर कुल क्षमता 30 KTPA होती है।

केंद्र सरकार के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स को प्राइवेट डेवलपर्स के जरिए BOO यानी Build, Own, Operate मॉडल पर लागू किया जाएगा। संबंधित डेवलपर्स प्रोजेक्ट में जरूरी निवेश करेंगे।

2030 तक 5 मिलियन टन का लक्ष्य

भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन को अपनी क्लीन एनर्जी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक हर साल 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता तैयार करना है। इसी दिशा में अब तक 16 कंपनियों को कुल 7,56,100 मीट्रिक टन प्रति साल ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता दी गई है। सरकार भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव्स के उत्पादन, इस्तेमाल और एक्सपोर्ट का ग्लोबल हब बनाना चाहती है।

ग्रीन हाइड्रोजन के घरेलू उत्पादन से आयातित फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता घट सकती है। इससे देश की एनर्जी सिक्योरिटी भी मजबूत होगी। साथ ही क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन और नेट-जीरो लक्ष्य को भी मदद मिलेगी।

ग्रीन अमोनिया और इलेक्ट्रोलाइजर पर भी जोर

ग्रीन हाइड्रोजन के साथ सरकार ग्रीन अमोनिया पर भी तेजी से काम कर रही है। केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में बताया कि देशभर की 11 फर्टिलाइजर यूनिट्स के साथ ग्रीन अमोनिया की खरीद और बिक्री के समझौते किए गए हैं। इन समझौतों के तहत हर साल 6,70,000 मीट्रिक टन ग्रीन अमोनिया के उत्पादन और सप्लाई का लक्ष्य है। ग्रीन अमोनिया को ग्रीन हाइड्रोजन का एक प्रमुख डेरिवेटिव माना जाता है।

इसके अलावा, NGHM के तहत 15 कंपनियों को कुल 3000 MW सालाना इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी दी गई है। इलेक्ट्रोलाइजर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है। सरकार के ये कदम बताते हैं कि भारत ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ईंधन के तौर पर तेजी से विकसित करने की तैयारी में है।

Updated on:
11 Aug 2026 07:26 pm
Published on:
11 Aug 2026 07:18 pm