
India Missile Production: DRDO की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पारंपरिक मिसाइल सेक्टर में भारतीय प्राइवेट सेक्टर को एंट्री की मोदी सरकार ने मंजूरी दी है। वहीं अब सरकार ने 1,500 किमी स्ट्राइक रेंज वाली मिसाइलों के निर्माण के लक्ष्य को लेकर कार्ययोजना पर काम शुरू किया है।
भारत सरकार 1,000-1,500 किमी रेंज वाली लैंड अटैक क्रूज मिसाइल और 150-500 किमी रेंज वाली प्रलय क्वासी-बैलिस्टिक टैक्टिकल मिसाइल के उत्पादन के लिए प्राइवेट कंपनियों को सलेक्ट करेगी। लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल का उत्पादन अब भारतीय प्राइवेट कंपनियां DRDO से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए करेंगी।
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, भारत सरकार ने अस्त्र मार्क-I (110 किमी रेंज) और मार्क-II (150 किमी रेंज) 'बियॉन्ड विजुअल रेंज' एयर-टू-एयर मिसाइलों के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए भारतीय प्राइवेट सेक्टर को 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' (RFP) पहले ही जारी कर दिए हैं। वहीं, ICOMM (हैदराबाद), भारत फोर्ज, अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (ADSTL), भारत डायनामिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी कंपनियां इन मिसाइलों के उत्पादन में शामिल होंगी।
भारत सरकार का यह फैसला प्राइवेट कंपनियों के लिए रणनीतिक मिसाइल सेक्टर को खोलने की दिशा में पहला बड़ा कदम है, क्योंकि मिसाइलों में लगने वाले लगभग 50 सब-सिस्टम प्राइवेट सेक्टर ही सप्लाई कर रहे हैं। मिसाइल निर्माण सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों के शामिल होने से देश में मिसाइल उत्पादन में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। साथ ही, प्राइवेट सेक्टर और उसकी सहायक इकाइयों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।