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Israel-Iran War: ईरान युद्ध के बीच भारत-रूस की अहम बैठक, क्या हुई बातचीत?

भारत और रूस ने दिल्ली में अहम विदेश कार्यालय परामर्श बैठक की। सोमवार को विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूसी उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने साझा अध्यक्षता की।

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Mar 30, 2026
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन। (फोटोःIANS)

जब पूरी दुनिया पश्चिम एशिया की जंग पर नजरें गड़ाए है, उसी वक्त भारत और रूस ने दिल्ली में एक अहम बैठक की। सोमवार को विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूस के उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने विदेश कार्यालय परामर्श बैठक की साझा अध्यक्षता की। यह बैठक ऐसे वक्त हुई जब मध्य-पूर्व में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और दुनिया के बड़े देश अपनी-अपनी चालें चल रहे हैं।

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क्या बात हुई इस बैठक में?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों देशों ने अपनी खास और विशेष रणनीतिक साझेदारी के पूरे दायरे की समीक्षा की।

दोनों तरफ से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर एक दूसरे के नजरिए साझा किए गए। सीधे शब्दों में कहें तो भारत और रूस ने यह देखा कि उनके रिश्ते किस मुकाम पर हैं, दुनिया में क्या हो रहा है और आगे क्या करना है।

मार्च में भी हो चुकी हैं दो बड़ी बातचीत

यह कोई अचानक हुई बैठक नहीं है। इससे पहले 17 मार्च को भारत और रूस ने नई दिल्ली में 7वां संयुक्त राष्ट्र परामर्श किया था।

उसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC के एजेंडे पर बात हुई थी, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ कदम, शांति स्थापना और UNSC में सुधार जैसे विषय शामिल थे।

उससे भी पहले 11 मार्च को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से फोन पर बात की थी। उस बातचीत में पश्चिम एशिया के हालात और दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई थी।

पुतिन की भारत यात्रा से मिली थी नई रफ्तार

इस पूरे सिलसिले की एक बड़ी बुनियाद दिसंबर में रखी गई थी जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिन के लिए भारत आए थे।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ औपचारिक बातचीत की थी। यह भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने का मौका भी था।

उसी दौरे में 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन हुआ और दोनों देशों ने एक साझा बयान जारी किया जिसमें ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, रक्षा और तकनीक में मिलकर काम करने पर जोर दिया गया।

जंग के बीच भारत की कूटनीति

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के बाद पश्चिम एशिया में जो आग भड़की है उसमें भारत अपना संतुलन बनाए हुए है। एक तरफ अमेरिका से रिश्ते हैं, दूसरी तरफ रूस और ईरान से भी पुराने संबंध हैं।

ऐसे नाजुक दौर में रूस के साथ यह लगातार बातचीत बताती है कि भारत किसी एक खेमे में जाने के बजाय अपनी स्वतंत्र राह पर चल रहा है और हर बड़े खिलाड़ी से संवाद बनाए हुए है।

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