17 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कब तक परमाणु हथियार बना लेगा ईरान? कैसे खतरे में आई ट्रंप की कुर्सी? अमेरिकी सलाहकार का बड़ा दावा

अमेरिकी राष्ट्रपतियों के सलाहकार और हवाई ताकत विशेषज्ञ प्रोफेसर रॉबर्ट पेप ने चेतावनी दी है कि ईरान अब दुनिया के पांच सबसे ताकतवर देशों में शामिल हो गया है। एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इस बात को गंभीर चेतावनी के रूप में व्यक्त किया।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Mar 30, 2026

Donald trump on on US-Israel-Iran War

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- ANI)

अमेरिका के कई राष्ट्रपतियों को सलाह दे चुके और हवाई ताकत के जाने-माने विशेषज्ञ प्रोफेसर रॉबर्ट पेप ने एक ऐसी बात कही है जो वाशिंगटन के गलियारों में हलचल मचा सकती है।

उन्होंने एएनआई को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा कि ईरान अब दुनिया के पांच सबसे ताकतवर देशों में आ गया है। और यह बात उन्होंने बड़े इत्मीनान से नहीं, बल्कि चेतावनी के तौर पर कही।

एक महीने पहले वाला ईरान नहीं रहा यह

प्रोफेसर पेप ने साफ कहा कि जो ईरान एक महीने पहले दुनिया में बीसवें नंबर की ताकत था, वो अब पहले पांच में है। हार्मुज स्ट्रेट पर उसकी पकड़ है, परमाणु हथियार बनाने की क्षमता उसके पास पहले से है और तेल की दौलत उसे हर दिन और मजबूत कर रही है।

उन्होंने कहा कि छह महीने से एक साल के अंदर ईरान तेल और परमाणु हथियार दोनों के साथ दुनिया का सबसे अमीर देश बन सकता है। यह सुनने में बड़ा लग सकता है लेकिन प्रोफेसर पेप के मुताबिक यही जमीनी हकीकत है।

तीन चरणों में समझिए यह पूरा खेल

प्रोफेसर पेप ने इस पूरे संघर्ष को तीन चरणों में समझाया। पहला चरण था अमेरिका की बमबारी, जो न तो अपने निशाने पर लगी और न ही रणनीतिक तौर पर कामयाब रही।

दूसरा चरण है ईरान का जवाब, जो अलग-अलग तरीकों से आ रहा है। तीसरा चरण होगा जब अमेरिका जमीनी फौज उतारेगा। उनके मुताबिक अभी हम पहले और दूसरे चरण के बीच में हैं। ईरान ने हार्मुज को अपने हाथ में ले लिया है और परमाणु हथियारों की दहलीज पर खड़ा है।

ईरान जंग नहीं चाहता लेकिन खिंचता जा रहा है उसमें

प्रोफेसर पेप ने एक दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि ईरान तीसरे चरण यानी जमीनी जंग में जाना नहीं चाहता लेकिन उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा। उनके शब्दों में कोई सुनहरा रास्ता नहीं है, कोई आसान निकास नहीं है। ईरान धीरे-धीरे उस तरफ खिंचता जा रहा है।

चार दशक बनाम चार हफ्ते, यही है असली विडंबना

प्रोफेसर पेप ने कहा कि ईरान ने चालीस साल तक कूटनीति की, बातचीत की, समझौते किए। बदले में उसे कुछ नहीं मिला, न ताकत, न तरक्की, न परमाणु हथियार। और पश्चिम हर बार कहता रहा कि यह काफी नहीं।

लेकिन जब चार हफ्ते की जंग हुई तो ईरान तेल का बादशाह बन गया और परमाणु हथियारों की दहलीज पर आ खड़ा हुआ। यह विडंबना पेप ने पश्चिम की नीतियों पर सीधा सवाल उठाते हुए कही।

ट्रंप के लिए दो रास्ते, दोनों कठिन

प्रोफेसर पेप ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किल को भी बड़े सीधे तरीके से रखा। उनके मुताबिक ट्रंप के सामने दो ही रास्ते हैं।

एक रास्ता है अभी समझौता करना, इजराइल पर दबाव बनाना और ऊंची कीमत चुकाकर भी बात खत्म करना। यह रास्ता कठिन है लेकिन शायद उनकी राष्ट्रपति की कुर्सी बच जाए।

दूसरा रास्ता है हार्मुज को जबरदस्ती खुलवाने के लिए जमीनी फौज उतारना। यह रास्ता और भी खतरनाक है और इसमें एक लंबी थका देने वाली जंग का खतरा है जो ट्रंप की राजनीतिक जिंदगी खत्म कर सकती है। पेप ने कहा कि ऐसी जंग में धीरे-धीरे रिपब्लिकन पार्टी के लोग भी ट्रंप से दूरी बनाने लगेंगे।