राष्ट्रीय

क्या ग्लोबल वार्मिंग मानसून को कमजोर कर देगी या भारत में पड़ेगा सूखा? IIT खड़गपुर के प्रोफेसर का खुलासा

Monsoon and Climate Change: ग्लोबल वार्मिंग से क्या भारत का मानसून कमजोर होगा या सूखे का खतरा बढ़ेगा, IIT खड़गपुर के प्रोफेसर अनिल के. गुप्ता ने पुरापाषाणिक अध्ययनों के आधार पर बताया कि मानसून भारत को कभी नहीं छोड़ेगा, हालांकि जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, सूखा और चरम मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

2 min read
Jun 02, 2026
Global Warming
ग्लोबल वार्मिंग (Photo - IANS)

Monsoon Research: इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने एवं सामान्य से 10 प्रतिशत कम बारिश की संभावनाओं के बीच कई लोग चिंतित हैं कि क्या ग्लोबल वार्मिंग मानसून को कमजोर कर देगी या भारत में सूखा पड़ जाएगा? लेकिन आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर अनिल के. गुप्ता (पूर्व डायरेक्टर, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी) ने पुरापाषाणिक अध्ययनों के आधार पर भरोसा दिलाया है कि मानसून भारत को कभी नहीं छोड़ेगा।

प्रो. गुप्ता ने कहा कि मानसून पिछले 13 मिलियन वर्ष (1.3 करोड़ साल) से इस भूमि पर मौजूद है। भारत प्रायद्वीप और उत्तर में ऊंची हिमालय पर्वत श्रृंखला की अनोखी भौगोलिक संरचना के कारण यह व्यवस्था बनी हुई है। जब तक यह भू-आकृति बनी रहेगी, मानसून भी बना रहेगा। उन्होंने कहा कि मानसून भारत की आत्मा है। यह पहले भी रहा, अब भी है और भविष्य में भी रहेगा। हालांकि निरंतरता का मतलब स्थिरता नहीं है। पुरापाषाणिक रिकॉर्ड बताते हैं कि मानसून में बड़े उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। करीब 4200 साल पहले एशिया के बड़े हिस्से में भयंकर सूखा पड़ा था, जिससे जनसंख्या पलायन हुआ। ये उतार-चढ़ाव प्राकृतिक थे, मानवीय हस्तक्षेप से पहले के।

मानसून तीव्र होगा, बाढ़-आपदा जैसी घटनाएं बढ़ेगी

प्रो. गुप्ता के अनुसार जलवायु परिवर्तन मानसून को खत्म नहीं करेगा बल्कि उसे और तीव्र बना सकता है। भविष्य में अत्यधिक घटनाएं बढ़ेंगी। कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसी भारी बारिश तो कुछ में सूखा। गर्मी बढ़ने से तेज हवाएं और अधिक वर्षा की संभावना है, लेकिन वितरण असमान होगा। मानसून पर निर्भर कृषि, जल संसाधन और अर्थव्यवस्था के लिए यह सकारात्मक और चुनौतीपूर्ण दोनों संदेश है। चिंता मानसून के लुप्त होने की नहीं, बल्कि इसके बदलते स्वरूप और बढ़ती अनिश्चितता की होनी चाहिए।

केरल की तरफ आगे बढ़ रहा मानसून

दक्षिण-पश्चिम मानसून के 4 जून को केरल तट से टकराने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने मंगलवार को अनुमान लगाया कि इस बार मानसून केरल में 4 जून के आसपास दस्तक दे सकता है। इससे पहले केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी समेत तटीय राज्यों में प्री-मानसून बारिश तेज हो गई है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार सामान्यतः मानसून केरल में 1 जून के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार पश्चिमी हवाओं की कमजोरी के कारण इसमें थोड़ी देरी हुई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। ऐसे में अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है। यदि पश्चिमी हवाएं अनुकूल रहीं, तो मानसून 30 जून तक पूरे देश को कवर कर सकता है।

Published on:
02 Jun 2026 10:56 pm