21 जुलाई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

epaper_icon

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

मुंबई कोर्ट ने 44 सोमाली पाइरेट्स को दी उम्रकैद, सरकारी वकील बोले- भारत में पहली बार हुआ ऐसा फैसला

Somali pirates: मुंबई की विशेष अदालत ने 2024 में गिरफ्तार 44 सोमाली समुद्री लुटेरों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषियों को समुद्री डकैती, UAPA, अपहरण और हत्या के प्रयास समेत कई मामलों में दोषी ठहराया गया।
2 min read
Google source verification
Pirate in Somalia

Pirate in Somalia

Somali pirates: मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने 2024 में अरब सागर और हिंद महासागर से गिरफ्तार किए गए 44 सोमाली समुद्री लुटेरों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला मैरीटाइम एंटी-पायरेसी एक्ट, UAPA और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत सुनाया गया। इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रंजीत सांगले ने कहा कि भारत के आजादी के बाद के न्यायिक इतिहास में यह पहला मामला है जब एंटी-पायरेसी एक्ट के तहत बनी स्पेशल कोर्ट ने सभी आरोपियों को कम से कम दो अलग-अलग अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

आजादी के बाद पहली बार सुनाया गया ऐसा फैसला

कोर्ट के फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रंजीत सांगले ने कहा कि यह मामला भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति और वैश्विक व्यापार की सुरक्षा के लिए एक बड़ी मिसाल कायम करेगा। उन्होंने कहा, "मेरी जानकारी के मुताबिक, भारत के आजादी के बाद के इतिहास में यह पहली बार है जब मैरीटाइम एंटी-पायरेसी एक्ट के तहत बनी स्पेशल सेशंस कोर्ट ने सभी आरोपियों को कम से कम दो अलग-अलग गंभीर अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई है।" सांगले ने बताया कि अभियोजन पक्ष के पास मजबूत इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत थे, जिनका इस्तेमाल कोर्ट में समुद्री लुटेरों का अपराध साबित करने के लिए किया गया।

भारतीय नौसेना ने बचाई थी 17 लोगों की जान

मामले की जानकारी देते हुए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने मार्च 2024 में भारतीय नौसेना द्वारा किए गए साहसी ऑपरेशन का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे समुद्री लुटेरों ने एक मर्चेंट जहाज (MV Ruen) को हाईजैक कर लिया था और लगभग 17 नाविकों को 90 दिनों से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा था। लुटेरों ने इन नाविकों को छोड़ने के बदले 60 मिलियन डॉलर (लगभग 500 करोड़ रुपये) की फिरौती की मांग की थी।

जब जहाज से मदद के लिए डिस्ट्रेस सिग्नल भेजा गया, तो भारतीय नौसेना दुनिया की एकमात्र ऐसी नौसेना थी जिसने तुरंत कार्रवाई की। समुद्र के बीच 40 घंटे से ज्यादा समय तक चले सैन्य ऑपरेशन में नौसेना के मार्कोस (MARCOS) कमांडो और युद्धपोतों ने सभी 17 बंधकों को सुरक्षित बचा लिया। इसके बाद, सभी 35 सोमाली समुद्री लुटेरों को गिरफ़्तार करके मुंबई लाया गया और येलो गेट पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया। इसी तरह के एक ऑपरेशन में, नौसेना ने पहले भी नौ सोमाली समुद्री लुटेरों को पकड़ा था, जिन्होंने ईरान की एक मछली पकड़ने वाली नाव को हाईजैक कर लिया था।

कोर्ट ने नहीं दिखाई कोई नरमी

सुनवाई के दौरान, सभी 44 आरोपियों ने कोर्ट के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) के जरिए अपनी अर्ज़ी दाखिल करते हुए, समुद्री लुटेरों ने कोर्ट से नरमी बरतने की अपील की। ​​उन्होंने दलील दी कि वे एक मित्र देश के गरीब नागरिक हैं और पिछले दो सालों से न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान उन्होंने बहुत मुश्किलों का सामना किया है।

उन्होंने भाषा की दिक्कत, भारतीय खान-पान की आदतें, सांस्कृतिक अंतर और परिवार के सहयोग की कमी का हवाला देते हुए सज़ा कम करने की मांग की। हालांकि, स्पेशल जज संजय डिगे ने अपराध की गंभीरता, हथियारों के इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग को खतरे में डालने की हरकत का हवाला देते हुए कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने उन सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई।