MEA Budget : देश विदेश में लोकप्रिय भारत के चॉकलेटी राजनीतिज्ञ शशि थरूर ने विदेश नीति को लेकर मास्टर स्ट्रोक लगाया है। उन्होंने विदेशी मामलों की समिति के अध्यक्ष के रूप में कुछ अहम लुभावने सुझाव दिए हैं।
Parliamentary Panel : संसदीय समिति (Parliamentary Panel) ने विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के लिए बजट (Budget Allocation) में 20% की शानदार वृद्धि (Hike) की सिफारिश की है। शशि थरूर (Shashi Tharoor) की अध्यक्षता वाली इस समिति (Committee) ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट (Report) पेश की। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत की विदेश नीति (Foreign Policy) को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाने की जरूरत है। इसके लिए एक नया विदेशी नीति दस्तावेज (Policy Document) तैयार करने का सुझाव दिया गया है। वर्तमान में मंत्रालय (MEA) का बजट केवल 7.81 प्रतिशत बढ़ा है, जो वैश्विक मंच (Global Platform) पर भारत के बढ़ते कद के हिसाब से काफी कम है। समिति का मानना है कि कूटनीतिक (Diplomatic) मजबूती के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी है। रिपोर्ट में विदेशोंं में रह रहे भारतीयों (Indian Diaspora) के कल्याण और सुरक्षा (Safety) पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही ओवरसीज मोबिलिटी बिल (Mobility Bill) को जल्द से जल्द संसद (Parliament) में लाने की बात कही गई है। इस कदम से विदेशों में काम करने वाले भारतीयों (Indian Workers) को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। यह भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि (International Image) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 के लिए विदेश मंत्रालय को 22,118.97 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह कुल केंद्रीय बजट का मात्र 0.41 प्रतिशत है। बजट आवंटन के मामले में विदेश मंत्रालय अन्य मंत्रालयों की तुलना में 23वें स्थान पर आता है। समिति ने जोर दिया है कि भारत जैसी उभरती वैश्विक शक्ति के लिए यह बजट नाकाफी है। इसलिए इसमें तुरंत 20 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए ताकि कूटनीतिक कार्यों को सुगमता से किया जा सके।
भारत के पास अभी तक 36 अन्य प्रमुख देशों (जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, जापान आदि) की तरह कोई एक लिखित और सार्वजनिक विदेश नीति दस्तावेज नहीं है। समिति ने कड़ाई से सिफारिश की है कि नीति नियोजन और अनुसंधान प्रभाग के माध्यम से एक स्पष्ट दस्तावेज बनाया जाए। इससे दुनिया को भारत के कूटनीतिक उद्देश्यों, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और द्विपक्षीय संबंधों का साफ पता चलेगा।
विदेशों में काम करने वाले 3.2 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'ओवरसीज मोबिलिटी बिल 2025' को विधायी प्राथमिकता देते हुए तत्काल पारित करने की सिफारिश की गई है। यह 1983 के पुराने अधिनियम की जगह लेगा। इसके अलावा, प्रवासी भारतीयों के हितों की रक्षा के लिए विदेश मंत्रालय के तहत एक अलग 'प्रवासी भारतीय मामलों का विभाग' बनाने का भी अहम सुझाव दिया गया है।
बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों की सुरक्षा के लिए एक अलग बजट 'सब-हेड' की मांग की गई है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सांस्कृतिक पहचान और सॉफ्ट पावर को मजबूत करने के लिए भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) का बजट बढ़ाकर 500-600 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव भी समिति ने दिया है।
इस रिपोर्ट पर विदेशी मामलों के जानकारों और पूर्व राजनयिकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक लिखित विदेश नीति दस्तावेज भारत को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावशाली बनाएगा और बजट बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में देश की पकड़ और मजबूत होगी। अब सभी की नजरें केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय पर हैं कि वे इन सिफारिशों को कितनी जल्दी लागू करते हैं।
आगामी संसद सत्र में 'ओवरसीज मोबिलिटी बिल 2025' को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की संभावना है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में कई मोर्चों पर भू-राजनीतिक संकट (जैसे पश्चिम एशिया विवाद) चल रहा है। ऐसे में भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा के लिए अलग से विभाग बनाने की सिफारिश कूटनीतिक लिहाज से एक दूरगामी कदम साबित हो सकती है। ( इनपुट: ANI)