Israel Iran South Pars Attack: इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांट साउथ पार्स पर भीषण हमला कर उसे तबाह कर दिया है। इस हमले से ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई है और खाड़ी देशों में युद्ध का खतरा चरम पर पहुंच गया है।
Israel Iran South Pars Attack : इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जहां से वापसी मुमकिन नहीं लग रही। इजराइल ने ईरान की आर्थिक नस' पर सीधा वार करते हुए उसके सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांट साउथ पार्स को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है। यह वही जगह है जहां से ईरान की आधी से ज्यादा कमाई होती थी। इस हमले के बाद ईरान की सांसें अटक गई हैं और पूरी दुनिया की नजरें अब खाड़ी देशों पर टिकी हैं कि क्या अब तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी।
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने खुद इस हमले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि उनकी सेना ने ईरान के असलुयेह (Asaluyeh) स्थित उस प्लांट को निशाना बनाया है, जो ईरान के कुल पेट्रोकेमिकल उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा संभालता था। काट्ज के अनुसार, अब ईरान के दो बड़े प्लांट ठप हो चुके हैं, जो देश के 85% निर्यात के लिए जिम्मेदार थे।इजराइल ने ईरान को आर्थिक रूप से कंगाल करने की तैयारी पूरी कर ली है।
कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भरोसा दिलाया था कि इजराइल दोबारा साउथ पार्स पर हमला नहीं करेगा। लेकिन सोमवार को जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया। दरअसल, साउथ पार्स सिर्फ ईरान का नहीं है, इसमें कतर की भी हिस्सेदारी है और यह दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है। अब इजराइल के इस कदम ने अमेरिका और कतर के बीच के रिश्तों को भी उलझा दिया है।
इजराइली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी ने साफ लफ्जों में कहा है कि ईरान को अब कोई छूट नहीं मिलेगी। मार्च में भी जब इजराइल ने यहां हमला किया था, तब ईरान ने पलटवार करते हुए कतर और खाड़ी क्षेत्र के अन्य ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी लगभग बंद कर दिया है, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुकने का खतरा पैदा हो गया है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले कहा था कि इजराइल अकेले दम पर ईरान को सबक सिखाएगा और उसने वही किया। इस हमले के बाद ईरान अब चुप नहीं बैठेगा। अगर ईरान ने फिर से पलटवार किया, तो खाड़ी के दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था भी खतरे में पड़ जाएगी। भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।