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ममता बनर्जी ने हटाया BJP ने कराई वापसी, पार्क स्ट्रीट रेप केस में पर्दाफाश करने वाली IPS को मिली बड़ी जिम्मेदारी

IPS Damayanti Sen: वरिष्ठ IPS अधिकारी दमयंती सेन को बंगाल सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए बने विशेष आयोग का सदस्य सचिव नियुक्त किया है।
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May 19, 2026
Bengal IPS
IPS दमयंती सेन को BJP में मिली बड़ी जिम्मेदारी

Park Street Rape Case: पश्चिम cकी राजनीति और पुलिस प्रशासन में लंबे समय तक चर्चा का केंद्र रहीं वरिष्ठ IPS अधिकारी दमयंती सेन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। साल 2012 के चर्चित पार्क स्ट्रीट रेप केस में अपनी निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली सेन को अब बंगाल की मौजूदा भाजपा सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए गठित विशेष आयोग में सदस्य सचिव नियुक्त किया है।

CM शुभेन्दु अधिकारी ने की नियुक्ति की घोषणा

सोमवार को मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने इस नियुक्ति की घोषणा करते हुए बताया कि यह विशेष आयोग राज्य में पिछले 15 सालों के दौरान महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हुए कथित अत्याचारों की जांच करेगा। सरकार के मुताबिक आयोग संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामलों की समीक्षा कर रिपोर्ट तैयार करेगा, जिससे पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया तेज हो सके।

पार्क स्ट्रीट रेप केस से पहचान

दमयंती सेन पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आईं, जब वह साल 2012 में कोलकाता पुलिस में संयुक्त आयुक्त (अपराध) के पद पर तैनात थीं। वह इस महत्वपूर्ण पद तक पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी भी बनी थीं। उसी दौरान कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में एक महिला ने आरोप लगाया था कि 6 फरवरी 2012 की रात नाइटक्लब से लौटते समय चलती कार में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। घटना सामने आने के बाद पूरे राज्य में भारी आक्रोश फैल गया और मामला राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में छा गया।

ममता बनर्जी के बयान से बढ़ा विवाद

तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुरुआत में इस घटना को साजिश करार देते हुए कहा था कि राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए मामला गढ़ा गया है। उनके इस बयान के बाद महिला अधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था।

दमयंती सेन की जांच में सामने आया सच

राजनीतिक दबाव और बढ़ते विवादों के बावजूद दमयंती सेन के नेतृत्व में पुलिस जांच लगातार आगे बढ़ती रही। जांच टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कुछ ही दिनों में आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म की घटना वास्तव में हुई थी। इस खुलासे के बाद राज्य सरकार के शुरुआती बयानों और पुलिस जांच के निष्कर्षों के बीच बड़ा विरोधाभास सामने आया। इसके बाद यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।

तबादले को लेकर उठे थे गंभीर सवाल

मामले के खुलासे के तुरंत बाद दमयंती सेन का तबादला लालबाजार स्थित क्राइम ब्रांच से बैरकपुर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज कर दिया गया था। राज्य सरकार ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया, लेकिन विपक्ष और कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इस फैसले पर सवाल खड़े किए। आलोचकों का आरोप था कि निष्पक्ष जांच और सरकार के आधिकारिक रुख से अलग तथ्य सामने लाने की वजह से सेन को संवेदनशील जिम्मेदारियों से दूर किया गया। हालांकि सरकार ने कभी आधिकारिक रूप से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया।

TMC शासन में सीमित रहीं भूमिकाएं

बेहतर शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मजबूत प्रशासनिक छवि के बावजूद राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना रहा कि तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान दमयंती सेन को अधिकतर संवेदनशील मामलों से दूर रखा गया। बाद में वह कोलकाता पुलिस की विशेष आयुक्त भी बनीं, लेकिन उन्हें बहुत कम हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच सौंपी गई।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने जताया भरोसा

साल 2022 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने दमयंती सेन को चार दुष्कर्म मामलों और चर्चित रसिका जैन मौत मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसे उनकी निष्पक्ष कार्यशैली और जांच क्षमता पर न्यायपालिका के भरोसे के रूप में देखा गया। इसके बाद वर्ष 2023 में उन्हें अतिरिक्त महानिदेशक (प्रशिक्षण) के पद पर नियुक्त किया गया।

अब नए आयोग में निभाएंगी अहम भूमिका

भाजपा सरकार के अनुसार न्यायमूर्ति चटर्जी की अध्यक्षता वाला यह आयोग संदेशखाली, कस्बा, बोगटुई समेत महिलाओं और बच्चों के खिलाफ कथित अपराधों से जुड़े कई संवेदनशील मामलों की जांच करेगा, जो पिछली सरकार के कार्यकाल में सामने आए थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दमयंती सेन की यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी है। वर्षों बाद उन्हें फिर ऐसी भूमिका मिली है, जहां उनकी निष्पक्ष छवि, जांच क्षमता और प्रशासनिक अनुभव सीधे केंद्र में होंगे।

Updated on:
19 May 2026 02:43 pm
Published on:
19 May 2026 02:43 pm