अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हुई है। निक स्टुअर्ट की नियुक्ति, ईरान का 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव और ट्रंप का सख्त रुख चर्चा में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस तनाव को लेकर अपना पक्ष रखा है।
Iran America War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। व्हाइट हाउस ने निक स्टुअर्ट (Nick Stewart) को उस टीम में शामिल करने की पुष्टि की है, जो ईरान के साथ चल रहे टकराव को खत्म करने के लिए बातचीत कर रही है। यह टीम विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की अगुवाई में काम कर रही है। निक स्टुअर्ट सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने स्टुअर्ट को एक अनुभवी और तेज दिमाग वाला नीति विशेषज्ञ बताया है। उनका कहना है कि स्टुअर्ट को ईरान से जुड़े मामलों का अच्छा अनुभव है। वह पहले ट्रंप प्रशासन के दौरान स्टेट डिपार्टमेंट में काम कर चुके हैं और कैपिटल हिल पर भी उनकी भूमिका रही है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी नियुक्ति में जेरेड कुशनर की अहम भूमिका बताई जा रही है।
स्टुअर्ट इससे पहले ‘फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज’ से जुड़े थे, जो ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की वकालत करता रहा है। ऐसे में उनकी एंट्री को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं कि क्या अमेरिका अब कूटनीति के साथ-साथ दबाव की नीति भी जारी रखेगा।
इसी बीच ईरान ने भी एक बड़ा कदम उठाया है। उसने अमेरिका समर्थित 9 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव के जवाब में अपना 14 सूत्रीय प्लान पेश किया है। बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। ईरान का कहना है कि वह अस्थायी युद्धविराम नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहता है। ईरान ने अमेरिका के दो महीने के युद्ध विराम के सुझाव को खारिज करते हुए कहा है कि सभी अहम मुद्दों को 30 दिनों के भीतर सुलझाया जाए। उसके प्रस्ताव में सुरक्षा की गारंटी, क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और नुकसान की भरपाई जैसे कई अहम बिंदु शामिल हैं।
इस पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख फिलहाल सख्त नजर आ रहा है। उन्होंने कहा है कि वह प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे, लेकिन उन्हें ईरान की मंशा पर भरोसा नहीं है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि ईरान ने अभी तक अपने पुराने कदमों की “पर्याप्त कीमत” नहीं चुकाई है।