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तेल-गैस के लिए मचेगा हाहाकार, चुन-चुन कर अब तेल टैंकों को निशाना बना रहा है ईरान, UAE से सामने आया भयानक वीडियो

Middle East Crisis: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों तरफ से ड्रोन और मिसाइल से अटैक जारी है।

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Mar 14, 2026
ईरान ने UAE तेल भंडारण टैंकों को बनाया निशाना (सोर्स: प्रतीकात्मक AI तस्वीर)

UAE Oil Terminal Fire: मिडिल ईस्ट में जंग की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। 28 फरवरी से शुरू हुआ अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव अब और खतरनाक होता जा रहा है। इसी बीच UAE के फुजैराह बंदरगाह से एक डरावना वीडियो सामने आया है, जिसमें तेल टर्मिनल के पास भीषण आग की लपटें उठती दिखाई दे रही हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने ड्रोन के जरिए यहां मौजूद तेल भंडारण टैंकों को निशाना बनाया, जिसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

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बता दें फुजैराह बंदरगाह (UAE’s Port of Fujairah) दुनिया के सबसे बड़े तेल स्टोरेज और जहाजों को ईंधन देने वाले केंद्रों में से एक माना जाता है, इसलिए इस हमले ने वैश्विक तेल बाजार को भी चिंता में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि हमले के बाद कुछ समय के लिए यहां तेल लोडिंग का काम भी रोकना पड़ा। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित इस रणनीतिक बंदरगाह पर हुए हमले ने मिडिल ईस्ट संकट को और गहरा कर दिया है और पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।

अमेरिका ने ईरान के खर्ग द्वीप पर की बमबारी

हाल ही में अमेरिका ने ईरान के खर्ग द्वीप पर बमबारी की, जिसे ईरान के तेल निर्यात का सबसे अहम केंद्र माना जाता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि इस हमले में ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद ईरान ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमले जारी रहे तो उसका मुहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात में भी तनाव बढ़ गया। दुबई के वित्तीय इलाके के पास धमाकों और धुएं की खबरें सामने आईं, जबकि बुर्ज खलीफा के आसपास की इमारतें भी धुएं से घिरती नजर आईं। वहीं फुजैराह बंदरगाह पर ड्रोन हमले के बाद तेल उद्योग से जुड़े इलाकों में आग लग गई, जिसे नागरिक सुरक्षा टीमों ने काफी कोशिशों के बाद काबू में किया।

तेल और गैस संकट की बढ़ी आशंका, जानिए एक्सपर्ट की राय

युद्ध की वजह से दुनिया में तेल और गैस संकट की चिंता बढ़ गई है। इस तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिख रहा है। अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो भारत जैसे देशों को भी ईंधन की कमी और महंगे तेल का सामना करना पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक आपूर्ति में कोई भी रुकावट सीधे आम लोगों की जेब और रसोई पर असर डाल सकती है।

युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि बाद में यह घटकर लगभग 100 डॉलर पर आ गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तनाव जल्दी खत्म हो जाता है, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका असर सीमित रह सकता है। लेकिन अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती हैं, तो महंगाई बढ़ सकती है और भारत का आर्थिक संतुलन भी दबाव में आ सकता है।

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