
अमेरिका से बढ़े तनाव के बीच ईरान के लिए ईराक बड़ा हथियार बन गया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने इस हफ्ते सऊदी अरब के तेल प्लांटों पर हमला किया था। अब जो जानकारी सामने आई है, वह काफी चौंकाने वाली है।
ये हमला दरअसल यमन से नहीं बल्कि इराक की जमीन से किया गया था। इराकी सशस्त्र गुटों के साथ मिलकर ये कार्रवाई हुई। क्षेत्रीय खुफिया आकलन में ये बात सामने आई है।
खुफिया रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की निगरानी में इराक से सऊदी अरब पर ये हमले हुए।
इस बीच, सऊदी अरब और उसके क्षेत्रीय साथी देशों का कहना है कि ईरान समर्थित मिलिशिया अब पहले से ज्यादा करीब आ गए हैं। 2023 में हमास के इजराइल पर हमले के बाद अमेरिका और इजराइल ने लेबनान से लेकर ईरान तक कई हमले किए, लेकिन इन गुटों की ताकत कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।
खुफिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अब ये गुट खुद-ब-खुद ट्रेनिंग और प्लानिंग कर रहे हैं। ईरान से इन्हें सीधे निर्देश लेने की जरूरत नहीं पड़ रही। चैथम हाउस के रिसर्चर फरिया अल-मुस्लिमी ने कहा कि एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस में अब सीधा समन्वय हो रहा है।
हमले का मुख्य निशाना सऊदी के पूर्वी प्रांत की तेल सुविधाएं थीं। ये इलाका सऊदी के कच्चे तेल का मुख्य केंद्र है। हूतियों ने खुद दावा किया कि उन्होंने हमले किए हैं। लेकिन असली कहानी इराक से जुड़ी हुई है।
सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ मिलकर इराक के उन ठिकानों पर हवाई हमले किए जिन्हें हमले का आधार माना गया। आधिकारिक तौर पर सऊदी ने इराक-ईरान समर्थित गुटों को जिम्मेदार ठहराया।
इस बीच, इराक सरकार ने कहा है कि वो इस मामले की जांच कर रही है। उधर, सऊदी के हमलों के बाद ईरान समर्थित मीडिया ने IRGC के सदस्यों, इराकी लड़ाकों और कम से कम एक हूती की मौत पर शोक जताया है।