
ईरान ने अमेरिका को साफ-साफ चेतावनी दी है कि अगर ट्रंप प्रशासन ने फिर से हमले किए तो वह दूसरे देशों के तेल और गैस प्लांटों को निशाना बनाएगा। इस धमकी से पूरा मिडिल ईस्ट फिर से तनाव की आग में घिर गया है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के शीर्ष नेताओं से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका या इजराइल की ओर से कोई भी साहसिक कदम उठाया गया तो ईरान मुंहतोड़ जवाब देगा। सऊदी विदेश मंत्री से बातचीत में अराघची ने साफ कहा कि अगर क्षेत्रीय देश भी इस हमले में शामिल हुए तो उचित जवाब मिलेगा।
ईरान के सुरक्षा मामलों से जुड़े मीडिया आउटलेट 'नूर न्यूज' ने तो और भी सीधा बयान दिया। उसने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमला किया तो सऊदी अरब और यूएई के तेल खदान, कतर के गैस फील्ड्स और इजराइल के ठिकानों पर हमले होंगे। रिपोर्ट में कहा गया- हमले में सब कुछ जलकर खाक हो जाएगा।
इसी बीच कुवैत की सेना ने शनिवार को बताया कि ईरान की ओर से लॉन्च किए गए ड्रोन को नष्ट कर दिया गया। उत्तरी कुवैत और बुबियान द्वीप पर हमले से कुछ संपत्ति को नुकसान पहुंचा, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। ये घटनाएं ईरान-ट्रंप तनाव के बीच हुई हैं।
कैंप डेविड में कैबिनेट बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे अभी भी ईरान के साथ डील करना चाहते हैं। लेकिन उन्होंने इरानियों पर से भरोसा टूटने की बात कही। उन्होंने कहा- वे वादे तोड़ते रहते हैं।
साथ ही उन्होंने साफ संकेत दिया कि जरूरत पड़ी तो हमला भी किया जाएगा। इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। फरवरी के अंत में शुरू हुए संघर्ष के बाद से ब्रेंट क्रूड 24 प्रतिशत चढ़ चुका है। विश्लेषक मान रहे हैं कि आगे और बढ़ोतरी हो सकती है।
हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवागमन लगभग ठप हो गया है, जो दुनिया के बड़े तेल निर्यात का रास्ता है। उधर, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बाब-एल-मंडेब स्ट्रेट को भी निशाना बनाने की धमकी दी है। ओमान के पास दो घटनाओं की खबर आई है, जिनमें एक टैंकर को नुकसान पहुंचा। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने इन घटनाओं की पुष्टि की।