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Sunday Guest Editor: पल्लवी ने एक कंप्यूटर से बदली गांव के बच्चों की डिजिटल दुनिया

सोच: संसाधनों की कमी कभी सफलता की राह नहीं रोकती। यदि शिक्षक में बच्चों को आगे बढ़ाने का जज्बा हो तो एक छोटा प्रयास भी बड़ी उपलब्धि में बदल सकता है।
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रायपुर

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Anupam Rajiv Rajvaidya

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Updated: 2 Aug 2026, 3:27 AM IST

Sunday Guest Editor

Sunday Guest Editor अकलतरा विकासखंड के छोटे से गांव रोगदा का शासकीय मिडिल स्कूल आज इस बात का उदाहरण बन गया है कि बदलाव के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से अधिक जरूरी एक समर्पित शिक्षक होता है। यहां न कंप्यूटर लैब है, न डिजिटल क्लास (Digital Class) और न ही निजी कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थान। इसके बावजूद स्कूल की शिक्षिका पल्लवी सिंह ने अपनी मेहनत और नवाचार (Innovation) से बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़कर उनकी दुनिया बदल दी है।

पहले कितावों में देखते थे: गांव के अधिकांश बच्चे पहले कंप्यूटर को केवल किताबों में देखते थे। इंटरनेट (Internet), टाइपिंग या ऑनलाइन आवेदन जैसी बातें उनके लिए नई थीं। पिछले वर्ष विद्यालय को केवल कार्यालयीन कार्यों के लिए एक कंप्यूटर (Computer) सिस्टम मिला। पल्लवी सिंह ने इसे केवल सरकारी काम तक सीमित नहीं रहने दिया। कार्यालय का काम पूरा होने के बाद वे प्रतिदिन समय निकालकर छठवीं, सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को कंप्यूटर की बुनियादी शिक्षा देने लगीं।

शुरुआत कंप्यूटर ऑन-ऑफ करने और कीबोर्ड की पहचान से हुई। धीरे-धीरे बच्चों ने हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग, इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस (Microsoft Office) पर काम करना, आवेदन पत्र तैयार करना, ऑनलाइन फॉर्म भरना और डिजिटल दस्तावेज तैयार करना सीख लिया। आज स्कूल के अधिकांश विद्यार्थी ये सभी कार्य आत्मविश्वास के साथ कर रहे हैं। डिजिटल शिक्षा (Digital Education) ने न केवल उनका तकनीकी ज्ञान बढ़ाया है, बल्कि आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति उनकी सोच भी बदल दी है।

जहां संसाधन हैं, वहां उपयोग नहीं; जहां कमी है, वहां बना उदाहरण: जांजगीर चांपा जिले के कई सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लास (Smart Class) और दर्जनों कंप्यूटर उपलब्ध हैं, लेकिन उनका उपयोग सीमित है। इसके विपरीत रोगदा के इस छोटे से विद्यालय में केवल एक कंप्यूटर के सहारे बच्चों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाया जा रहा है। पल्लवी सिंह का मानना है कि यदि शिक्षक (Teacher) सीखने और सिखाने का संकल्प ले, तो सीमित संसाधन भी बड़ी उपलब्धि का आधार बन सकते हैं। विद्यालय के विद्यार्थी अब कंप्यूटर चलाने के साथ आत्मविश्वास से अंग्रेजी में संवाद भी कर रहे हैं।

संदेश: एक छोटी सी पहल से ग्रामीण परिवेश के इन बच्चों में आया यह बदलाव उनके उज्ज्वल भविष्य की नई संभावनाएं खोल रहा है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तक (Textbook) तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों को समय के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार करना भी है। (जांजगीर-चांपा से आनंद नामदेव की स्पेशल स्टोरी)