
Modi government over the Israel-Lebanon issue : कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि अमेरिका-ईरान समझौते का दुनिया भर में स्वागत किया गया है। सबसे बड़ा खतरा इजरायल की ओर से है। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री जैसे शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति ने अभी-अभी पूरे लेबनान को जलाने की बात कही है, लेकिन हमेशा की तरह मोदी सरकार पूरी तरह चुप है। उनका कहना है कि मोदी सरकार इससे एकदम अनजान बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल के प्रति अंधभक्ति हमारे देश के हितों को नुकसान पहुंचा रही है, उनका एक ही मकसद है कि बस किसी तरह मोदानी साम्राज्य के हित सुरक्षित रह जाएं।
चार सैनिकों की हत्या के बाद धुर दक्षिणपंथी इजरायली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गिवीर का कहना है कि लेबनान को पूरी तरह जल जाना देना चाहिए। अमेरिकियों के प्रति पूर्ण सम्मान के साथ, इजरायल को पूरी दुनिया को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि हमारे बेटों का खून और हमारे नागरिकों की सुरक्षा सौदेबाजी का विषय नहीं है। ध्यान रहे कि पश्चिम एशिया युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इजरायल को हुए नुकसान की घोषणा सबसे पहले की गई थी। गिवीर ने एक बयान में कहा, 'अमेरिकियों के प्रति पूर्ण सम्मान के साथ, इजरायल को पूरी दुनिया को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि हमारे बेटों का खून और हमारे नागरिकों की सुरक्षा सौदेबाजी का विषय नहीं है। पूरा लेबनान जलकर राख हो जाना चाहिए।'
अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने पर समझौता हो गया है। यह समझौता अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हमले शुरू होने के चार महीने बाद आया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के दौरान इस पर साइन किए। ध्यान रहे कि 14 बिंदुओं वाले इस समझौते को मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) कहा गया है और इसके मुताबिक़ ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
अमेरिका और ईरान में समझौते का भारत पर भी असर होगा। भारत के लिए पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से तेल और गैस की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलने और समुद्री यातायात की स्वतंत्रता बहाल होने से भारत के आयात-निर्यात को बड़ा फायदा मिलेगा। क्यों कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शांति समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे दुनिया भर में आर्थिक व्यवधान कम होगा और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बहाल होगी।