
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने हाल ही में अंतरिक्ष चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक जॉइंट प्रोजेक्ट पर साथ काम करने के लिए सहमति जताई है, जिसके लिए एक ढांचागत समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं। यह समझौता ISRO के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र के निदेशक दिनेश कुमार सिंह और AIIMS के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।
मानव अंतरिक्ष मिशन के दौरान स्पेस मेडिसिन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ISRO और AIIMS ने साथ काम करने का फैसला लिया है। दोनों संस्थान मिलकर अंतरिक्ष यात्रियों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्पेस मेडिसिन और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में जॉइंट रिसर्च करेंगे।
ISRO और AIIMS की पार्टनरशिप का क्या उद्देश्य है, मन में यह सवाल आना भी स्वाभाविक है। इस पार्टनरशिप का उद्देश्य मानव अंतरिक्ष मिशनों के दौरान मानव स्वास्थ्य, प्रदर्शन और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। दोनों संस्थानों के बीच सहयोग ISRO की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा, जिसमें पृथ्वी-आधारित और अंतरिक्ष-आधारित अध्ययन शामिल हैं। मुख्य फोकस अंतरिक्ष चिकित्सा में बहु-विषयक विशेषज्ञता विकसित करना, चिकित्सा उपकरणों, प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल का निर्माण करना है, जो चरम अंतरिक्ष वातावरण में मानव स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करेंगे।
ISRO और AIIMS के इस जॉइंट प्रोजेक्ट से रिसर्च जैसे क्षेत्रों में मानव शरीर विज्ञान, इम्यूनोलॉजी, जीनोमिक्स, माइक्रोग्रैविटी में मस्कुलोस्केलेटल स्वास्थ्य, माइक्रोबायोम, व्यवहारिक स्वास्थ्य, हृदय और स्वायत्त विनियमन शामिल हैं। दोनों के बीच इस पार्टनरशिप से भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, जैसे गगनयान मिशन मज़बूत होंगे। अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी, विकिरण और लंबी अवधि की यात्रा के प्रभावों की रिसर्च कर अंतरिक्ष यात्री के स्वास्थ्य चुनौतियों जैसे हड्डी का नुकसान, मांसपेशी क्षय और रक्त संचार परिवर्तन को संबोधित किया जाएगा। इसके अलावा यह रिसर्च धरती पर स्वास्थ्य देखभाल में सुधार ला सकता है, जैसे ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग और मांसपेशी हानि के उपचार में। साथ ही इससे अंतःविषयक रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा, नए नवाचारों को जन्म मिलेगाऔर भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को समर्थन मिलेगा। यह पार्टनरशिप देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए नए अवसर पैदा करेगा, जो अंततः मानवता के लाभ के लिए होगा।