
Congress response to JP Nadda: भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर पार्टी पर तीखा हमला बोला। इस पर अब कांग्रेस का जवाब आया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा मोदी सरकार की तीखी और सीधी आलोचना से भाजपा हिल गई है। उन्होंने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि सरकार की बौखलाहट लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को वॉटअबाउटरी का अंतहीन सिलसिला बताया।
जयराम रमेश ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को बचकानी उंगली उठाने की राजनीति से आगे बढ़ना चाहिए। उन्हें पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अभूतपूर्व विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि NTA की स्थापना मोदी सरकार ने विशेष रूप से परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए की थी। मोदी सरकार ने जानबूझकर परीक्षा प्रणाली का केंद्रीकरण किया, उसे NTA के माध्यम से संचालित किया और विश्वविद्यालयों व राज्यों पर इसे अपनाने का दबाव बनाया। पहले से मौजूद व्यवस्था को खत्म करके NTA को खड़ा किया गया।
इसके बाद NTA लगातार पूरी तरह कॉम्प्रोमाइज और अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह अक्षम साबित हुई। अपनी स्थापना के बाद से अब तक इसके कार्यकाल में कम-से-कम 9 बार पेपर लीक हुए हैं। इनमें 2024 की वे घटनाएं भी शामिल हैं, जब अनियमितताओं के कारण NTA को कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं।
उन्होंने आगे कहा कि साल 2024 की भारी विफलता के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NTA में सुधार का वादा किया था। इसके लिए के. राधाकृष्णन समिति का गठन किया गया, जिसने NTA में सुधार के लिए 101 सिफारिशें दीं। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने के बजाए धर्मेंद्र प्रधान टालमटोल करते रहे। उन्होंने कहा कि NTA में महानिदेशक का पद जो इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्यकारी पद है। वह 2024 के पेपर लीक से लेकर 2026 के पेपर लीक तक पूरे समय अतिरिक्त प्रभार के रूप में ही अधिकारियों के पास रहा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस वजह से NTA की निगरानी में NEET-UG 2026 का एक और पेपर लीक हुआ और परीक्षा रद्द करनी पड़ी। यहां तक कि इस स्थिति में भी NTA और उच्च शिक्षा विभाग ने संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के सामने बेशर्मी से दावा किया कि कोई पेपर लीक नहीं हुआ था। मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के लिए सच्चाई से ज्यादा अपनी छवि मायने रखती थी।
इसी बीच, हमेशा की तरह अहंकारी मंत्री प्रधान ने संसद और उसके विवेकपूर्ण सुझावों के प्रति अपना पूर्ण अनादर दिखाते हुए केवल इसलिए शिक्षा संबंधी स्थायी समिति की NTA को मजबूत बनाने वाली सिफारिशों को खारिज कर दिया क्योंकि उस समिति में विपक्ष के सदस्य भी शामिल थे। देशभर में भारी आक्रोश के बाद भी NTA के अधीन आयोजित UGC-NET समाजशास्त्र 2026 परीक्षा के पेपर लीक और UGC-NET अंग्रेज़ी 2026 परीक्षा में अनियमितताओं की खबरें सामने आईं।
जब छात्र पेपर लीक और मोदी सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे, तो प्रधानमंत्री और उनके सहयोगी मंत्री प्रधान ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर अभूतपूर्व बर्बरता दिखाई। उनके खिलाफ लाठीचार्ज, वॉटर कैनन, आंसू गैस और खबरों के अनुसार पेलेट गन तथा शॉक बैटन तक का इस्तेमाल किया गया। NEET-UG 2026 का पेपर लीक केवल एक लक्षण है, बीमारी इससे कहीं अधिक गहरी है। देश के छात्रों का गुस्सा मंत्री प्रधान की व्यापक अक्षमता, मोदी सरकार की बेहद खराब शिक्षा नीतियों और प्रधानमंत्री के अहंकार के खिलाफ है।