
Jammu Kashmir terrorism: जम्मू-कश्मीर में तीन दशक से अधिक समय बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि मई के महीने में न तो कोई आतंकवादी घटना हुई है और न ही आतंकवाद से किसी की जान गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले पांच महीनों में आतंकवाद से जुड़ी केवल 12 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें नौ आतंकवादी, एक सुरक्षा बल का जवान, विवादित पहचान वाला एक स्थानीय व्यक्ति और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं। इस वर्ष अब तक किसी भी नागरिक की मौत दर्ज नहीं हुई है।
| साल | मौतें (आतंकवाद से) |
|---|---|
| 2000 | 288 |
| 2001 | 300 |
| 2002 | 288 |
| 2003 | 241 |
| 2004 | 195 |
| 2005 | 188 |
| 2006 | 140 |
इसके बाद आंकड़ों में गिरावट आना शुरू हुई। 2017, 2018 और 2019 में मई के महीने में 37-37 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद रुझान फिर बदला और 2020 में 28, 2021 में 16, 2022 में 38, 2023 में 14, 2024 में सात और 2025 में 43 मौतें दर्ज की गईं। 2026 में यह आंकड़ा शून्य पर पहुंच गया है।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि लगातार चलाए गए आतंकवाद-रोधी अभियानों, बेहतर समन्वय और स्थानीय स्तर पर आतंकवादियों की भर्ती में आई भारी गिरावट का परिणाम है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि आतंकवादी संगठनों को मिलने वाला समर्थन ढांचा काफी कमजोर हो चुका है। भर्ती के आंकड़े ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार आतंकवादी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे लगातार चलाए गए जागरूकता अभियान, बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर, विकास परियोजनाओं का विस्तार और आम लोगों का बदलता दृष्टिकोण प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के कुप्रयास अभी भी जारी हैं। मई में भले ही कोई मौत दर्ज नहीं हुई हो, लेकिन सुरक्षा बल अभी भी क्षेत्र के कई स्थानों पर घेराबंदी और तलाशी अभियान चला रहे हैं। किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
| साल | मौतें (सालाना) |
|---|---|
| 2000 | 2,799 |
| 2001 | 4,011 |
| 2002 | 3,098 |
| 2003 | 2,507 |
| 2004 | 1,789 |
| 2005 | 1,717 |
इसके बाद सालाना मौतों की दर 2006 में 1,125 तो वहीं 2012 तक 121 तक सिमट गई। 2023 में यह संख्या घटकर 134 और 2024 में 127 रह गई। वर्ष 2025 के अंत तक यह संख्या 121 तक पहुंच गई। 2026 के पहले पांच महीनों में दर्ज 12 मौतें अब तक का सबसे कम आंकड़ा हैं।