Ranchi to Delhi air ambulance crash: झारखंड में रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सभी सात लोगों की मौत हो गई। विमान में ब्लैक बॉक्स नहीं होने से जांच मुश्किल हो गई है। मौसम, रडार खराबी और मार्ग से विचलन हादसे की संभावित वजहों के रूप में जांच के दायरे में हैं।
Jharkhand air ambulance crash: झारखंड में सोमवार रात हुई एयर एंबुलेंस विमान दुर्घटना की जांच कई चुनौतियों के बीच आगे बढ़ रही है। अधिकारियों के अनुसार हादसे का शिकार हुआ छोटा मेडिकल एवाक्यूएशन विमान ब्लैक बॉक्स से लैस नहीं था, जिससे दुर्घटना के कारणों का पता लगाना कठिन हो सकता है। नागरिक उड्डयन नियमों के तहत 5,700 किलोग्राम से कम वजन वाले विमानों में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) अनिवार्य नहीं होते।
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अब जांच एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुई बातचीत, मलबे के विश्लेषण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर ही आगे बढ़ेगी। DGCA के मुताबिक, विमान ने रांची से शाम 7:11 बजे उड़ान भरी थी और रात करीब 10 बजे दिल्ली पहुंचने की उम्मीद थी।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या विमान के ऑनबोर्ड वेदर रडार में खराबी के कारण पायलट ने निर्धारित मार्ग से खतरनाक मोड़ लिया। उसी मार्ग पर पहले एयर इंडिया और इंडिगो की उड़ानों को भी खराब मौसम का सामना करना पड़ा था। जहां इंडिगो की फ्लाइट ने बाईं ओर मोड़ मांगा, वहीं दुर्घटनाग्रस्त विमान ने दाईं ओर विचलन की अनुमति ली थी।
यह विमान 1987 में निर्मित Beechcraft C90 King Air मॉडल का था और दिल्ली स्थित रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित किया जा रहा था। जानकारी के अनुसार यह विमान 2018 से 2022 तक इस्तेमाल में नहीं था और बाद में खरीदा गया था।
हादसे के समय विमान में एक मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिक, दो सहायक और दो पायलट सवार थे। पायलट विवेक विकास भगत के पास लगभग 1,400 घंटे और सह-पायलट सवराजदीप सिंह के पास करीब 450 घंटे का उड़ान अनुभव था।
रडार रिकॉर्ड के अनुसार विमान ATALI वेपॉइंट पार करने से पहले मार्ग से भटक गया। अंतिम रडार संपर्क शाम 7:22 बजे 13,800 फीट की ऊंचाई पर हुआ, जबकि अंतिम रेडियो संपर्क 7:34 बजे कोलकाता कंट्रोल से हुआ। इसके बाद विमान से संपर्क पूरी तरह टूट गया।
घटना की जांच के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम मौके पर पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण सुराग दे सकते हैं, खासकर यह समझने में कि क्या विमान खराब मौसम, तेज हवा के झोंकों या नियंत्रण खोने के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
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